Indian Census Penalty Rules; देश में साल 2027 से शुरू होने जा रही डिजिटल जनगणना को लेकर सरकार ने नए और बड़े अपडेट जारी कर दिए हैं. इस बार की जनगणना पूरी तरह से आधुनिक होगी, जिसमें लोगों को मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद दर्ज करने की बड़ी सुविधा मिलेगी. लेकिन इस नए अपडेट के साथ ही सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें और डर भी फैल रहा है.

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लोग अक्सर पूछते हैं कि अगर ऑनलाइन फॉर्म भरते समय या अधिकारी को बताते समय गलती से कोई गलत जानकारी दर्ज हो गई, तो क्या पुलिस सीधे घर आकर गिरफ्तार कर लेगी. आइए देश के कानून और जनगणना के कड़े नियमों के हवाले से जानते हैं कि गलत जानकारी देने पर वास्तव में किस तरह की कार्रवाई होती है.

सेंसस एक्ट 1948 के तहत गलत जानकारी देना है अपराध

भारत में जनगणना की पूरी प्रक्रिया एक बेहद कानूनी ढ़ाचे के तहत पूरी की जाती है, जिसे सेंसस एक्ट 1948 कहा जाता है. इस कानून के मुताबिक, देश के हर नागरिक की यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह जनगणना अधिकारी द्वारा पूछे गए सभी सवालों का बिल्कुल सही जवाब दें.

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सेंसस एक्ट की धारा 11 में साफ तौर पर लिखा गया है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या फिर सवालों के जवाब देने से पूरी तरह मना करता है, तो इसे एक दंडनीय अपराध माना जाएगा. इसके साथ ही, अपने घर या परिसर में जनगणना अधिकारी को आने से रोकना भी कानूनी उल्लघंन है.

क्या सीधे पुलिस उठा ले जाएगी?

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि क्या गलत जानकारी देने पर पुलिस तुरंत जेल में डाल देगी. कानून के अनुसार, जनगणना में गलत जवाब देने पर सीधे पुलिस द्वारा अचानक उठा ले जाने जैसी कोई बात नहीं है. इसके लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है.

अगर कोई नागरिक जानबूझकर अधिकारियों को गुमराह करता है या गलत आंकड़े लिखवाता है, तो दोष सिद्ध होने पर कोर्ट की तरफ से उस पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. हालांकि, कानून में कुछ गंभीर मामलों में जेल की सजा का प्रावधान भी है, लेकिन आम तौर पर यह भारी लापरवाही या जानबूझकर सरकारी काम में बड़ा व्यवधान डालने पर ही लागू होता है. 

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पहली बार मिला है स्वगणना का विकल्प

इस बार की डिजिटल जनगणना में सरकार ने आम जनता की सहूलियत के लिए एक बेहद शानदार सुविधा दी है, जिसे स्वगणना कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि लोगों को अब अनिवार्य रूप से अधिकारी के सामने खड़े होकर जवाब देने की जरूरत नहीं होगी.

नागरिक खुद ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने पूरे परिवार की आवश्यक जानकारियां और डेटा सुरक्षित तरिके दर्ज कर सकते हैं. मकानों और परिवारों से जुड़े इन सवालों की संख्या करीब 33 तय की गई है. इस ऑनलाइन सुविधा का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोग बिना किसी डर या जल्दबाजी के अपने घर के आराम से बिल्कुल सटीक आंकड़े भर सकें.

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