Moon Collision With Earth: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में कई ऐसी काल्पनिक परिस्थितियां हैं, जो इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती हैं. इनमें से सबसे भयानक और रोंगटे खड़े कर देने वाली कल्पना यह है कि यदि हमारा चांद अचानक अपनी कक्षा से भटक जाए और सीधे पृथ्वी की ओर गिरने लगे, तो क्या होगा. विज्ञान और भौतिकी के नियमों के आधार पर अगर इस स्थिति का विश्लेषण किया जाए, तो यह किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन से कहीं ज्यादा खौफनाक और विनाशकारी साबित होगा. नासा और दुनिया भर के खगोलविदों के मुताबिक, चांद के धरती के करीब आते ही वास्तविक टक्कर से बहुत पहले ही पृथ्वी पर तबाही का खौफनाक मंजर दिखना शुरू हो जाएगा.

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समुद्रों में उठेगी 100 मीटर ऊंची सुनामी

खगोलीय गणनाओं के अनुसार, जब चांद अपनी सामान्य दूरी लगभग 3,84,400 किलोमीटर को छोड़ते हुए पृथ्वी के बेहद करीब यानी करीब 2 लाख किलोमीटर की दूरी पर पहुंचेगा, तो असली तबाही शुरू होगी. इतनी दूरी पर आते ही चांद की ज्वारीय शक्ति और गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पृथ्वी पर कई गुना बढ़ जाएगा. इसका सबसे पहला और सीधा असर हमारे महासागरों पर पड़ेगा. समुद्रों में 100 मीटर से भी ऊंची और विशाल सुनामी की लहरें उठने लगेंगी. ये खौफनाक लहरें दुनिया के तमाम तटीय इलाकों, बड़े शहरों और टापुओं को पल भर में निगल जाएंगी.

धरती पर आएगा भूकंप, फटेंगे ज्वालामुखी

तबाही सिर्फ पानी तक सीमित नहीं रहेगी. चांद का अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों पर इतना भारी दबाव डालेगा कि पूरी धरती का संतुलन बिगड़ जाएगा. इसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर ऐसे महाभूकंप आएंगे जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर आज तक नहीं मापी गई है. जमीन फटने लगेगी और इस भयानक खिंचाव के कारण दुनिया भर के सभी शांत और सक्रिय ज्वालामुखी एक साथ उबलने लगेंगे. 

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रोश सीमा पर टूटकर बिखर जाएगा चांद

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आएगा जब चांद धरती से मात्र 18,470 किलोमीटर की दूरी पर होगा. खगोल विज्ञान में इसे रोश सीमा कहा जाता है. इस दूरी पर आते ही पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल चांद के अपने आंतरिक गुरुत्वाकर्षण से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगा. इसका नतीजा यह होगा कि चांद सीधे टकराने से पहले ही अंतरिक्ष में ही ताश के पत्तों की तरह टूटकर अरबों टुकड़ों में बिखर जाएगा. ये टुकड़े पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने लगेंगे और कुछ समय के लिए धरती के चारों ओर शनि ग्रह जैसी एक खूबसूरत लेकिन बेहद खतरनाक रिंग बन जाएगी.

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पिघल जाएगी पृथ्वी

इसके बाद शुरू होगा इस तबाही का अंतिम चरण. अंतरिक्ष में तैर रहे चांद के ये विशालकाय टुकड़े और मलबे उल्कापिंडों की तरह भारी रफ्तार से पृथ्वी पर गिरने लगेंगे. जब चांद का मुख्य और भारी हिस्सा पृथ्वी की सतह से टकराएगा, तो उससे इतनी अविश्वसनीय मात्रा में ऊर्जा पैदा होगी कि धरती का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह पिघल जाएगा और खौलते हुए लावे के समंदर में बदल जाएगा. टक्कर के प्रभाव से अरबों टन धूल, जहरीली गैसें और मलबे की मोटी परत पृथ्वी के वायुमंडल को चारों तरफ से घेर लेगी.

छा जाएगा हमेशा के लिए अंधेरा 

इसका सीधा अंजाम यह होगा कि सूर्य की रोशनी पूरी तरह ब्लॉक हो जाएगी और धरती पर कई वर्षों के लिए ग्लोबल अंधेरा छा जाएगा. धूप न मिलने के कारण पृथ्वी का तापमान तेजी से गिरेगा और चारों तरफ भीषण बर्फबारी और कंपा देने वाली ठंड शुरू हो जाएगी. बिना धूप के पेड़-पौधे नष्ट हो जाएंगे, जिससे ऑक्सीजन और भोजन की चेन पूरी तरह टूट जाएगी. इस भयावह और सर्द माहौल में इंसानों, जानवरों और वनस्पतियों का बच पाना पूरी तरह असंभव होगा और इस तरह पृथ्वी से जीवन का नामोनिशान हमेशा के लिए मिट जाएगा.

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