MARCOS Commandos: दुश्मन के इलाके में अमेरिकी सेना ने हाल ही में एक काफी जोखिम भरा बचाव अभियान चलाया है. अमेरिका ने ईरान की जमीन में घुसकर अपने पायलट को बचा लिया है. इस मिशन को अमेरिका की सील की टीम ने पूरा किया है. यह काफी ज्यादा खतरनाक स्पेशल फोर्स है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या भारत के पास भी सील की तरह कोई खास कमांडो फोर्स है.

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भारत के जानलेवा मार्कोस कमांडो 

भारत की खास नेवी स्पेशल फोर्स को मार्कोस के नाम से जाना जाता है. इसकी स्थापना 1987 में हुई थी और अक्सर इसकी तुलना अमेरिका की नेवी सील से की जाती है. इन कमांडो को समुद्र, जमीन और हवा तीनों जगह पर काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है. यही ट्रेनिंग इन्हें भारतीय सेना की सबसे बहुमुखी और जानलेवा फोर्स में से एक बनाती है.

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काफी खतरनाक ट्रेनिंग 

मार्कोस कमांडो बनना कोई मामूली बात नहीं है. इनकी ट्रेनिंग को दुनिया की सबसे मुश्किल ट्रेनिंग में से एक माना जाता है. इसमें 90% से ज्यादा लोग बीच में ही ट्रेनिंग छोड़ देते हैं. उम्मीदवार को शारीरिक और मानसिक रूप से काफी मुश्किल हालात से गुजरना पड़ता है. इसमें 20 किलोमीटर से ज्यादा लंबी दूरी तक तैरना, लगातार कई किलोमीटर तक मार्च करना और ऐसे सर्वाइवल ड्रिल शामिल हैं जो उन्हें इंसान की शारीरिक सीमाओं से भी आगे ले जाते हैं. 

चुपके से काम करने में माहिर 

मार्कोस को अक्सर खामोश योद्धा भी कहा जाता है. इनके ऑपरेशंस काफी खुफिया होते हैं और पूरी सटीकता के साथ अंजाम दिए जाते हैं. इन्होंने 2008 के मुंबई हमलों के जवाब में, समुद्री डाकुओं के खिलाफ ऑपरेशंस में और कारगिल युद्ध जैसे रणनीतिक सैन्य अभियानों में बड़ी भूमिका निभाई है. 

एक दाढ़ी वाली सेना

दिलचस्प बात यह है कि मार्कोस कमांडो को कभी-कभी दाढ़ी वाली सेना भी कहा जाता है. खुफिया मिशन के दौरान वे स्थानीय लोगों के बीच घुलने-मिलने के लिए दाढ़ी बढ़ा लेते हैं. इससे ना सिर्फ उन्हें भेष बदलने में मदद मिलती है बल्कि दुश्मनों पर एक मनोवैज्ञानिक बढ़त भी हासिल होती है. 

आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस 

ये कमांडो आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं. इनमें मॉडर्न असॉल्ट राइफलें, स्नाइपर सिस्टम, पानी के अंदर इस्तेमाल होने वाले उपकरण और रियल टाइम निगरानी वाले उपकरण शामिल हैं. टेक्नोलॉजी के मामले में आगे होने की वजह से वे मुश्किल से मुश्किल ऑपरेशंस को भी तेजी और सटीकता के साथ अंजाम दे सकते हैं.

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