Bab Al Mandeb Strait: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने कई बड़े वैश्विक शिपिंग रास्तों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. होर्मुज स्ट्रेट में रूकावटों को लेकर पहले ही चिंताएं बनी हुई हैं वहीं अब एक और रणनीतिक जलमार्ग सुर्खियों में आ चुका है. यमन के ईरान समर्थित हूथी आंदोलन ने बाब अल मंडेब स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है. यह एक संकरा समुद्री रास्ता है जो बड़े वैश्विक व्यापार मार्गों को आपस में जोड़ता है.  इसी बीच आइए जानते हैं क्या होता है बाब अल मंडेब का मतलब और अगर यह रास्ता बंद हुआ तो दुनिया में कैसे आएगी तबाही. 

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बाब अल मंडेब का मतलब

बाब अल मंडेब शब्द अरबी भाषा से आया है और इसका मतलब है आंसुओं का द्वार. इस स्ट्रेट को यह नाम इस वजह से मिला क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इस रास्ते से जुड़ी परिस्थितियों काफी ज्यादा खतरनाक रही हैं. पिछली सदियों में यहां की तेज समुद्री धाराएं, संकरे रास्ते और जहाज के बार-बार डूबने की घटनाओं की वजह से इस क्षेत्र में कई समुद्री हादसे हुए हैं. आज भी यह नाम इसी बात का प्रतीक है कि यह समुद्री रास्ता कितना जोखिम भरा है.

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काफी जरूरी शिपिंग मार्ग 

बाब अल मंडेब स्ट्रेट अरब प्रायद्वीप पर बसे यमन और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के देशों के बीच स्थित है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से और हिंद महासागर से जोड़ता है. यह दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री चोकपॉइंट में से एक बना हुआ है. एशिया और यूरोप के बीच यात्रा करने वाले जहाज अक्सर स्वेज नहर में प्रवेश करने से पहले इसी स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं.

वैश्विक ईंधन संकट का जोखिम 

इस स्ट्रेट को बंद करने का सबसे गंभीर परिणाम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आने वाली रुकावट होगी. दुनिया का लगभग 9% समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है. अगर इस रास्ते से होने वाली शिपिंग को रोक दिया जाता है तो कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस ले जाने वाले तेल टैंकरों को मजबूरन लंबे समुद्री रास्ते को चुनना होगा. अगर ऐसा होता है तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल सकता है. इससे भारत के साथ-साथ कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है और ईंधन की लागत में भी वृद्धि हो सकती है. 

एशिया और यूरोप के बीच सप्लाई चेन में रुकावट

यह स्ट्रेट कमर्शियल शिपिंग के लिए भी काफी ज्यादा जरूरी है. यह यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले सबसे छोटे समुद्री रास्ते का एक हिस्सा है. अगर यह रास्ता किसी भी वजह से बंद हो जाता है तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से होते हुए केप ऑफ गुड होप के रास्ते से जाना पड़ेगा. इस लंबे रास्ते से जहाज की यात्रा में कई हफ्ते ज्यादा लग सकते हैं. 

रोजमर्रा के सामान की कमी 

अगर यह रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है तो दुनिया भर में आम इस्तेमाल के सामान की कमी हो सकती है. रोजमर्रा के कई सामान जिनमें अनाज, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और फैक्ट्रियों में बना समान शामिल है, कौन समुद्री रास्ता पर निर्भर करते हैं जो लाल सागर और बाब अल मंडेब स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं. अगर माल की ढुलाई धीमी हो जाती है यह ज्यादा महंगी हो जाती है तो दुनिया भर के बाजारों में जरूरी सामान की सप्लाई कम हो सकती है और उनकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं.

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