समुद्री व्यापार के लिए दुनिया की सबसे व्यस्त धमनी माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव की लहरें उठने लगी हैं. अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर जहाजों की जब्ती ने वैश्विक सप्लाई चेन को सकते में डाल दिया है, और इस घटना की जद में भारत आने वाले जहाज भी आ गए हैं. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा दो बड़े मालवाहक जहाजों पर गोलीबारी के बाद से ही समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं. आखिर ये जहाज क्या ले जा रहे थे और इनके पीछे की असली वजह क्या है, यह सवाल अब हर किसी के जेहन में है.
ईरान का बड़ा एक्शन और जहाजों की पहचान
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जिस तेजी के साथ इस सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ईरान के सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किए गए इन दो जहाजों की पहचान 'एमएससी फ्रांसेस्का' (MSC Francesca) और 'एपामिनोंडास' (Epaminondas) के रूप में हुई है. 'एमएससी फ्रांसेस्का' पर पनामा का झंडा फहरा रहा था, जबकि 'एपामिनोंडास' जहाज लाइबेरिया के झंडे के साथ समुद्र में सफर कर रहा था. इन दोनों जहाजों का कब्जा किया जाना कोई मामूली घटना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक दबाव का सीधा नतीजा है.
भारत आ रहा था जहाज, रास्ते में हुआ हमला
जहाज ट्रैकिंग डेटा से मिली जानकारी बेहद गंभीर है. इनमें से एक जहाज, 'एपामिनोंडास', दुबई से अपनी व्यावसायिक यात्रा शुरू करके गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर बढ़ रहा था. यह जहाज 'इंड्यूसा' (INDUSA) सर्विस के तहत भारत आ रहा था, जो कि समुद्री व्यापार के लिहाज से एक महत्वपूर्ण रूट माना जाता है. इसी तरह 'एमएससी फ्रांसेस्का' को हिमालय एक्सप्रेस सर्विस के जरिए भारत और श्रीलंका के बंदरगाहों पर पहुंचना था. अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य के पास इन जहाजों पर हमला कर इन्हें ईरान ले जाया गया.
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क्या लेकर आ रहे थे ये जहाज?
इन जहाजों के अंदर मौजूद सामान को लेकर अब आधिकारिक पुष्टि की कवायद शुरू हो गई है. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, ये दोनों विशाल कंटेनर जहाज 'जनरल कंटेनराइज्ड कार्गो' लेकर आ रहे थे. इनमें औद्योगिक कच्चे माल और वाणिज्यिक सामानों के होने की प्रबल संभावना है. ये जहाज भारत को फारस की खाड़ी और अमेरिका के पूर्वी तटों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों पर काम करते हैं. इन जहाजों में जो कुछ भी था, वह पूरी तरह से व्यावसायिक था, जिसका संबंध किसी भी प्रकार की सैन्य सामग्री से नहीं बताया गया है.
ईरान का दावा और जब्त करने की वजह
ईरान की ओर से इन जहाजों को जब्त करने के पीछे के तर्क बेहद सख्त और राजनीतिक हैं. आईआरजीसी (IRGC) ने दावा किया है कि 'एमएससी फ्रांसेस्का' जैसे जहाजों का संबंध सीधे तौर पर 'जायोनी शासन' यानी इजरायल से है. ईरान का यह भी कहना है कि इन जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का पालन नहीं किया, इनके पास जरूरी परमिट की कमी थी और इनके नेविगेशन सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की गई थी. इन तकनीकी और राजनीतिक आधारों पर ईरान ने इन्हें नियम तोड़ने वाला करार दिया और सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर इन्हें अपनी सीमा के भीतर ले लिया.
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