Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने होर्मुज स्ट्रेट जैसे जरूरी वैश्विक शिपिंग मार्ग को बाधित कर दिया. यह जरूरी रास्ता वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है. यहां किसी भी तरह की रुकावट कई उद्योगों में हलचल मचा देती है. यही वजह है कि अब तेल और गैस के अलावा भी कई क्षेत्रों में कमी और कीमतों में उछाल महसूस किया जा रहा है.

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ऊर्जा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा मार 

इसका पहला और सबसे साफ असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है. मार्च में कच्चे तेल की कीमत बढ़कर लगभग 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. यह 4 साल का सबसे ज्यादा स्तर था. इस उछाल ने दुनिया भर में ईंधन की लागत को सीधे तौर पर बढ़ा दिया है. इसी के साथ एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी बाधित हुई है. भारत जैसे देश जो मिडिल ईस्ट से होने वाले इंपोर्ट पर काफी ज्यादा निर्भर हैं, आपूर्ति के दबाव का सामना कर रहे हैं. कतर जैसे प्रमुख गैस केंद्रों पर हुए हमलों ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है. इस वजह से सरकारों को केरोसिन के वितरण को बढ़ाने जैसे कदम उठाने पड़े. 

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उर्वरक आपूर्ति पर दबाव 

कृषि क्षेत्र भी इसकी मार झेल रहा है. यूरिया और अमोनिया जैसे उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा प्राकृतिक गैस पर ही निर्भर होता है. इसका ज्यादातर हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है. आपूर्ति में रुकावट की वजह से उर्वरक उत्पादन में 10% से 15% तक की गिरावट आने की उम्मीद है. इसके अलावा उर्वरक निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे फॉस्फोरिक एसिड और सल्फर की कमी की वजह से वे महंगे होते जा रहे हैं. इसका सीधा असर फसल चक्र पर पड़ सकता है. 

बिटुमेन की कमी 

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी हो रही है क्योंकि बिटुमेन की आपूर्ति कम हो गई है. क्योंकि बिटुमेन कच्चे तेल से मिलता है इस वजह से तेल की बढ़ती कीमतों ने सड़क निर्माण को काफी महंगा बना दिया है. इससे राजमार्ग परियोजनाओं की रफ्तार धीमी हो गई है और कुल निर्माण लागत बढ़ गई है. इसका असर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और निजी विकास दोनों पर पड़ रहा है.

एल्युमिनियम की कीमतों में उछाल 

वैश्विक एल्युमिनियम उत्पादन में मिडिल ईस्ट का एक अहम योगदान है. आपूर्ति में रुकावट की वजह से एल्युमिनियम की कीमतें 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. इसका असर ऑटोमोबाइल, पैकेजिंग और निर्माण जैसे उद्योगों पर भी पढ़ रहा है. यहां एल्युमिनियम एक प्रमुख कच्चा माल है. 

हीलियम की कमी 

इसका एक अहम असर हीलियम की कमी पर भी पड़ रहा है. मध्य पूर्व इस गैस का एक प्रमुख सप्लायर है. यह सेमीकंडक्टर बनाने और एमआरआई मशीनों जैसे मेडिकल उपकरणों के लिए काफी जरूरी है. हीलियम की सप्लाई में रुकावट से चिप का प्रोडक्शन धीमा हो सकता है और हेल्थ केयर सेवाओं पर असर पड़ सकता है.

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