US Iran War Ceasefire: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्तों के सीजफायर का ऐलान किया है. अमेरिका और ईरान के बीच अचानक दो हफ्तों के सीजफायर की घोषणा ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. कुछ समय पहले दोनों देशों के बीच हालात इतने खराब हो गए थे कि बड़े हमले की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब अस्थायी तौर पर लड़ाई रोकने का फैसला किया गया है. ऐसे हालात में आम लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर सीजफायर होता क्या है, इसके नियम क्या होते हैं और अगर कोई देश इसे तोड़ दे तो क्या उसे सजा मिलती है. तो आइए जानते हैं कि सीजफायर के नियम क्या होते हैं और क्या इसे तोड़ने वाले पर पेनाल्टी लग सकती है. 

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क्या होता है सीजफायर?

सीजफायर का मतलब लड़ाई या हिंसा को रोक देना होता है. जब दो देश या पक्ष आपसी सहमति से गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने का फैसला करते हैं, तो उसे सीजफायर कहा जाता है. यह अस्थायी भी हो सकता है जैसे कुछ दिन या हफ्तों के लिए और स्थायी भी, इसका मुख्य उद्देश्य हिंसा को तुरंत रोकना, बातचीत के लिए मौका देना, घायलों को इलाज और लोगों को राहत पहुंचाना होता है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि सीजफायर के बाद विवाद खत्म हो जाए. तनाव बना रह सकता है.

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सीजफायर के नियम क्या होते हैं?

सीजफायर का कोई एक तय नियम नहीं होता है, लेकिन आम तौर पर कुछ बातें सभी समझौतों में शामिल होती हैं. जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे और सीमा पर शांति बनाए रखेंगे. नई सैन्य कार्रवाई, बमबारी या सैनिकों की आक्रामक तैनाती नहीं की जाती, अस्पताल, स्कूल और आम लोगों के इलाकों को निशाना नहीं बनाया जाता,  कई बार किसी तीसरे पक्ष (जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन) को यह देखने की जिम्मेदारी दी जाती है कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं. अफवाहें और भड़काऊ खबरें रोकने की कोशिश की जाती है ताकि माहौल खराब न हो. 

क्या इसे तोड़ने वाले पर पेनाल्टी लग सकती है?

अगर कोई देश सीजफायर का उल्लंघन करता है तो इसे गंभीर मामला माना जाता है. हालांकि सीधी पेनाल्टी हर बार तय नहीं होती, लेकिन कुछ कदम उठाए जा सकते हैं. जैसे दूसरा देश इसकी शिकायत अंतरराष्ट्रीय मंच पर कर सकता है. संयुक्त राष्ट्र (UN) में मामला उठाया जा सकता है, इसके अलावा दोषी देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती है. साथ ही आर्थिक या कूटनीतिक दबाव डाला जा सकता है. कई बार हालात बिगड़ने पर फिर से युद्ध भी शुरू हो सकता है. 

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