दुनिया जब पहले से ही युद्धों और तनावों से जूझ रही है, तभी वेनेजुएला और अमेरिका से जुड़ी खबरों ने नई बेचैनी पैदा कर दी है. वेनेजुएला के ऊपर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, सख्त बयान और कूटनीतिक टकराव के बीच सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सिर्फ दबाव की राजनीति है या किसी बड़े संघर्ष की शुरुआत है?  और अगर हालात इससे ज्यादा बिगड़े, तो कौन-सा देश किसके साथ खड़ा होगा और इसका असर पूरी दुनिया पर कैसे पड़ेगा. इस बात की चर्चा अब तेज हो गई है. आइए जान लेते हैं. 

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वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तनाव की पृष्ठभूमि

अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते पिछले कई सालों से तनावपूर्ण रहे हैं. इसकी बड़ी वजह वेनेजुएला की आंतरिक राजनीति, चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल, मानवाधिकारों को लेकर आरोप और अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हैं. अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है, जबकि वेनेजुएला इसे अपनी संप्रभुता में दखल बताता है. 

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सैन्य कार्रवाई और वास्तविक स्थिति

बीते दिन खबर आई और सोशल मीडिया पोस्ट्स में भी देखने को मिला कि अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर दी गई है और वहां के राष्ट्रपति मादुरो को यूएस ने पकड़ लिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है. अमेरिका का कहना है कि अब जब तक वेनेजुएला में हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक इसे वो ही चलाएगा. अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह रुख रहा है कि उसकी प्राथमिकता कूटनीति, दबाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, न कि खुला युद्ध. 

क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की ओर इशारा है

विशेषज्ञों कहते हैं कि मौजूदा हालात को सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध से जोड़ना अतिशयोक्ति होगी. अभी तक न तो किसी वैश्विक सैन्य गठबंधन ने युद्ध की घोषणा की है और न ही बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव के संकेत मिले हैं. हालांकि, यह जरूर सच है कि अगर किसी क्षेत्रीय संकट में बड़े देश सीधे आमने-सामने आ जाएं, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं. तब इसे सीधे तौर पर तीसरा विश्व युद्ध माना जा सकता है.

अगर मामला बढ़ा तो कौन सा देश किसके साथ होगा

संभावित टकराव की स्थिति में अमेरिका को उसके पारंपरिक सहयोगियों जैसे कुछ पश्चिमी देश और क्षेत्रीय साझेदारों का समर्थन मिल सकता है. वहीं वेनेजुएला को रूस, चीन और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों से राजनीतिक या कूटनीतिक समर्थन मिलने की संभावना जताई जाती है. हालांकि, यह समर्थन अधिकतर राजनयिक और आर्थिक स्तर तक सीमित रहने की उम्मीद की जाती है, न कि सीधे युद्ध में उतरने तक. वहीं भारत जैसे देश ऐसे मामलों में हमेशा से तटस्थ रहे हैं. 

वैश्विक असर और आम लोगों की चिंता

वेनेजुएला तेल उत्पादक देश है, इसलिए वहां अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. इसके अलावा, किसी भी बड़े टकराव से शरणार्थी संकट, व्यापार में बाधा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में असंतुलन पैदा हो सकता है. यही कारण है कि दुनिया के कई देश इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं.

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