Top Coal Rich Countries in World: आज भी दुनिया की बड़ी आबादी की बिजली और उद्योग कोयले पर ही निर्भर हैं. बिजली प्रोडक्शन से लेकर स्टील, सीमेंट और कई भारी उद्योगों तक, कोयला वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, हालांकि कई देश अब सोलर और विंड एनर्जी जैसी ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बाद कोयले की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. दुनिया में कुछ ऐसे देश हैं जिनके पास कोयले का इतना बड़ा भंडार है कि आने वाले कई दशकों तक अपनी एनर्जी जरूरतें पूरी कर सकते हैं. वहीं कुछ देश कोयले के सबसे बड़े निर्यातक बनकर पूरी दुनिया को सप्लाई कर रहे हैं. भारत भी इस सूची में तेजी से आगे बढ़ रहा है. देश के पास दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक मौजूद है और प्रोडक्शन के मामले में भारत अब दूसरे नंबर पर पहुंच चुका है. ऐसे में आइए जानते हैं दुनिया में सबसे ज्यादा कोयला कहां होता है और भारत के पास आखिर कितना कोयला स्टोर है.
दुनिया में सबसे ज्यादा कोयला कहां होता है?
चीन दुनिया में सबसे ज्यादा कोयला प्रोडक्शन करने वाला देश है. अकेले चीन पूरी दुनिया के लगभग आधे कोयले का प्रोडक्शन करता है. यहां विशाल कोयला खदानें और मजबूत माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है. चीन हर साल करीब 4.1 अरब टन कोयला पैदा करता है. देश के पास लगभग 143 अरब टन कोयले का भंडार मौजूद है. चीन में बनने वाली करीब 55 प्रतिशत बिजली आज भी कोयले से तैयार होती है. यही वजह है कि चीन सबसे बड़ा प्रोड्यूसर होने के बाद भी ज्यादा कोयला निर्यात नहीं करता, क्योंकि उसका ज्यादातर कोयला घरेलू जरूरतों में ही इस्तेमाल हो जाता है.
भारत के पास आखिर कितना कोयला स्टोर है?
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला प्रोड्यूस करने वाला देश बन चुका है. तेजी से बढ़ती आबादी और बिजली की मांग के कारण भारत में कोयले की जरूरत लगातार बढ़ रही है. भारत के पास करीब 319 अरब टन कोयले का विशाल भंडार मौजूद है, जो दुनिया में सबसे बड़े रिजर्व में शामिल है. देश हर साल लगभग 88 करोड़ टन कोयले का प्रोडक्शन कर रहा है. भारत में करीब 70 प्रतिशत बिजली प्रोडक्शन अभी भी कोयले पर आधारित है. सरकार घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को खनन की अनुमति दे रही है और नई कोयला खदानों की नीलामी भी कर रही है, हालांकि भारत प्रोडक्शन में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन निर्यात के मामले में अभी इसकी हिस्सेदारी कम है क्योंकि देश में खपत बहुत ज्यादा है. दुनिया के बड़े कोयला निर्यातक देश 1. इंडोनेशिया - इंडोनेशिया को दुनिया का सबसे बड़ा कोयला निर्यातक माना जाता है. यहां का थर्मल कोयला काफी उच्च क्वालिटी वाला होता है, जिसकी मांग एशियाई देशों में बहुत ज्यादा है. इंडोनेशिया हर साल करीब 620 मिलियन टन कोयले का प्रोडक्शन करता है और इसमें से लगभग 480 मिलियन टन दूसरे देशों को निर्यात करता है.भारत, चीन और जापान जैसे देश इंडोनेशिया से बड़ी मात्रा में कोयला खरीदते हैं. यहां का कम सल्फर वाला कोयला बिजलीघरों के लिए काफी उपयोगी माना जाता है. 2. अमेरिका - अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा कोयला रिजर्व मौजूद है. यहां लगभग 250 अरब टन से ज्यादा कोयले का भंडार बताया जाता है. अमेरिका हर साल करीब 525 मिलियन टन कोयले का प्रोडक्शन करता है. हालांकि वहां अब धीरे-धीरे नई एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन इसके बाद अमेरिका दुनिया के बड़े कोयला निर्यातकों में शामिल है. अमेरिका खासतौर पर स्टील उद्योग में इस्तेमाल होने वाला मेटलर्जिकल कोयला निर्यात करता है. इसका कोयला यूरोप और एशिया के कई देशों में जाता है.
यह भी पढ़ें -जहां है दिल्ली का जिमखाना, वहां कितने में है जमीन? जानें रियल एस्टेट के दाम 3. ऑस्ट्रेलिया - ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े कोयला निर्यातकों में गिना जाता है. यहां का कोकिंग कोयला स्टील बनाने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. ऑस्ट्रेलिया हर साल करीब 550 मिलियन टन कोयले का प्रोडक्शन करता है और लगभग 390 मिलियन टन निर्यात करता है.जापान, चीन और भारत इसके सबसे बड़े ग्राहक हैं. साथ ही मजबूत बंदरगाह और रेलवे नेटवर्क की वजह से ऑस्ट्रेलिया वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है. एशिया में तेजी से क्यों बढ़ रही कोयले की मांग?
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कोयले की मांग लगातार बढ़ रही है. भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में उद्योगों और बिजली प्रोडक्शन के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का इस्तेमाल हो रहा है. यही वजह है कि इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश अपने बंदरगाह, रेलवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को लगातार मजबूत कर रहे हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा निर्यात किया जा सके.दुनिया में अब सिर्फ ज्यादा कोयला ही नहीं, बल्कि बेहतर क्वालिटी वाले कोयले की मांग भी तेजी से बढ़ रही है.
स्टील इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोयले की मांग सबसे ज्यादा है. इसका फायदा खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों को मिल रहा है, जहां हाई क्वालिटी वाला कोयला उपलब्ध है, हालांकि दुनिया अब ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले कई दशकों तक कोयला पूरी तरह खत्म नहीं होगा. बिजली प्रोडक्शन और भारी उद्योगों में अभी भी कोयला सबसे सस्ता और भरोसेमंद ईंधन माना जाता है.
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