मेरठ के बहुचर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में अदालत द्वारा दोषियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद एक बार फिर देश में फांसी की प्रक्रिया और उससे जुड़े पहलुओं पर चर्चा शुरू हो गई है. लगभग 13 महीने तक चले इस लंबे मुकदमे में सौरभ राजपूत की हत्या और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में यह सख्त फैसला आया है. अदालत से फांसी की सजा तय होते ही लोगों के मन में यह उत्सुकता जाग उठी है कि आखिर जेलों में दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाने वाले जल्लाद को कितनी तनख्वाह मिलती है और यह रकम उसे कौन चुकाता है?
तिहाड़ जेल में जल्लाद का वेतन और नियुक्ति प्रक्रिया
राजधानी दिल्ली स्थित एशिया की सबसे बड़ी तिहाड़ जेल में जल्लाद का कोई स्थायी या मासिक वेतन का पद तय नहीं है. जब भी किसी मामले में किसी दोषी को फांसी देने का वारंट जारी होता है, तब जेल प्रशासन विशेष रूप से फांसी देने के लिए प्रति कैदी के हिसाब से मानदेय तय करता है. तिहाड़ जेल के पास अपना कोई नियमित जल्लाद नहीं है, इसलिए जरूरत पड़ने पर उत्तर प्रदेश की मेरठ जेल या अन्य राज्यों के जेल प्रशासनों से संपर्क करके पेशेवर जल्लाद को बुलाया जाता है.
फांसी देने पर मिलने वाली तय राशि और प्रक्रिया
मीडिया रिपोर्टों और जेल अधिकारियों की जानकारी के मुताबिक, तिहाड़ जेल में किसी एक दोषी को फांसी पर लटकाने के एवज में जल्लाद को लगभग 25,000 रुपये तक की रकम दी जाती है. यह भुगतान किसी स्थायी सरकारी नौकरी के तहत मिलने वाली मासिक तनख्वाह नहीं, बल्कि प्रति काम के आधार पर तय किया जाने वाला मेहनताना होता है. जब तक फांसी की तारीख तय नहीं होती या फांसी का कोई मामला सामने नहीं आता, तब तक जल्लाद को इस काम के लिए कोई अलग से नियमित वेतन नहीं मिलता है.
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निर्भया केस के दोषी को फांसी देने पर जल्लाद को कितने मिले थे रुपये?
निर्भया केस के चार दोषियों को फांसी दिए जाने का उदाहरण इस पूरी व्यवस्था और आर्थिक पहलू को आसानी से समझाता है. इस मामले में दोषियों को फंदे पर लटकाने वाले मेरठ के पवन जल्लाद को प्रत्येक दोषी के हिसाब से 20,000 से 25,000 रुपये का भुगतान किया गया था. केवल फांसी लटकाने का ही पैसा नहीं दिया जाता, बल्कि पूरी प्रक्रिया का खर्च शामिल होता है. निर्भया मामले में पवन जल्लाद को यात्रा भत्ता, जेल में डमी प्रैक्टिस और वास्तविक फांसी की पूरी प्रक्रिया मिलाकर कुल 1,00,000 से 1,08,800 रुपये तक का कुल भुगतान किया गया था, जिसमें से टैक्स कटने के बाद उन्हें करीब 93,920 रुपये प्राप्त हुए थे.
जल्लाद की फीस और खर्चों का भुगतान कौन करता है?
जल्लाद को मिलने वाली इस राशि और यात्रा खर्च का पूरा भुगतान संबंधित राज्य सरकार और जेल प्रशासन द्वारा किया जाता है. उदाहरण के लिए, जब दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी की तामील होती है, तो दिल्ली सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन मिलकर इसका बजट आवंटित करते हैं. यदि जल्लाद को किसी दूसरे राज्य (जैसे उत्तर प्रदेश) से बुलाया जाता है, तो दोनों राज्यों के जेल नियमों के तहत आपसी प्रशासनिक समझौते से इस राशि और भत्तों का अंतिम हस्तांतरण किया जाता है.
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