Most Powerful Tank: अमेरिका का M1A2 Abrams और जर्मनी का Leopard 2A8 दुनिया के सबसे ताकतवर युद्ध के टैंक में गिने जाते हैं. इनका एडवांस्ड आर्मर, ताकतवर बंदूक और बेहतरीन टारगेटिंग सिस्टम इन्हें युद्ध के मैदान में काफी खतरनाक बनाते हैं. हालांकि आधुनिक युद्ध का तरीका काफी बदल चुका है. रूस यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट के संघर्ष ने दिखाया है कि सस्ते ड्रोन और एडवांस्ड एंटी टैंक मिसाइलों से सबसे महंगे टैंकों को भी खतरा हो सकता है. आइए जानते हैं कि आज के युद्ध में यह टैंक कितने सफल हैं.
ड्रोन ने युद्ध के मैदान को बदल दिया
आधुनिक टैंक के लिए सबसे बड़ा खतरा ड्रोन का तेजी से बढ़ावा है. छोटे ड्रोन की कीमत सिर्फ $500 से $1000 के आसपास हो सकती है. इसके बावजूद भी वे कई मिलियन डॉलर की कीमत वाले टैंक को नुकसान पहुंचा सकते हैं या फिर पूरी तरह से नष्ट भी कर सकते हैं.
टैंक ऊपर से ज्यादा कमजोर होते हैं क्योंकि उनकी छत और इंजन वाले हिस्सों में आमतौर पर सामने के आर्मर की तुलना में कम सुरक्षा होती है. जैवलिन जैसी टॉप अटैक मिसाइलें ऊपर से कमजोर हिस्सों पर हमला करके ऐसा ही खतरा पैदा करती हैं.
इस वजह से सेना को टैंक की सुरक्षा के बारे में फिर से सोचना पड़ा है. अब सिर्फ भारी आर्मर काफी नहीं है. टैंक को इलेक्ट्रॉनिक वाॅरफेयर, काउंटर ड्रोन सिस्टम पर एक्टिव प्रोटेक्शन की भी जरूरत होती है.
जर्मनी का आधुनिक टैंक
Leopard 2A8 जर्मनी के मशहूर लेपर्ड टैंक परिवार के सबसे नए वर्जन में से एक है. इसमें 120 एमएम L55A1 स्मूथबोर गन और एडवांस्ड सुरक्षा और इलेक्ट्रानिक सिस्टम लगे हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा इसका ओवरऑल बैलेंस है. इसमें मजबूत फायर पावर और सुरक्षा के साथ-साथ बेहतर मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स का तालमेल है. नाटो देशों के साथ इसके जुड़ाव से ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स और गोला बारूद की सप्लाई के मामले में भी फायदा मिलता है.
आधुनिक युद्ध के लिए लॉजिस्टिक्स उतना ही जरूरी हो सकता है जितना फायर पावर. जिस टैंक की मरम्मत और सप्लाई आसानी से हो सकती है उसके लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के दौरान ऑपरेशनल बने रहने की संभावना ज्यादा होती है.
अमेरिका का युद्ध में परखा हुआ टैंक
M1A2 Abrams दुनिया के सबसे ज्यादा युद्ध में परखे गए टैंक में से एक है. इसकी ताकतवर 120 एमएम तोप, बेहतरीन फायर कंट्रोल सिस्टम और भारी आर्मर इसे युद्ध के मैदान में जबर्दस्त क्षमता देते हैं.
यह 1500 हॉर्स पावर के गैस टरबाइन इंजन से चलता है. यह जबरदस्त परफॉर्मेंस तो देता है लेकिन काफी ज्यादा ईंधन की खपत भी करता है. इससे लंबे सैन्य अभियानों के दौरान लॉजिस्टिक्स की एक बड़ी चुनौती पैदा होती है. हाल ही में हुए युद्ध के अनुभव से यह भी पता चलता है कि यह टैंक ड्रोन के हमले के प्रति कितना संवेदनशील है.
रूस का T-14 अरमाटा
रूस के T-14 अरमाटा का डिजाइन काफी ज्यादा अनोखा है. इसका बुर्ज बिना चालक का है. चालक दल टैंक की मुख्य बॉडी के अंदर एक सुरक्षित बख्तरबंद कैप्सूल में बैठता है. इस बनावट का मकसद चालक दल के बचने की संभावना को बढ़ाना है.
वैसे तो बाकी दोनों टैंक की तुलना में युद्ध के मैदान में इसका वास्तविक अनुभव सीमित है लेकिन सिर्फ युद्ध के अनुभव से इसकी वास्तविक युद्ध क्षमता का आकलन करना काफी मुश्किल है.
K2 ब्लैक पैंथर
दक्षिण कोरिया का यह टैंक एक और काफी एडवांस्ड आधुनिक टैंक है. इसमें 120 एमएम की गन, ऑटोमेटिक लैंडिंग सिस्टम और बेहतरीन फायर कंट्रोल तकनीक है. इसका सबसे बड़ा फायदा इसकी गतिशीलता है. यह टैंक मुश्किल और पहाड़ी इलाकों में काफी प्रभावी ढंग से कम कर सकता है. इससे यह उन जगहों के लिए खास तौर पर एकदम सही बैठता है जहां काफी भारी टैंकों को परेशानी हो सकती है.
इसके एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और गतिशीलता टैंक डिजाइन में एक ट्रेंड को दिखाते हैं. आधुनिक टैंकों को अब सिर्फ बख्तरबंद सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय फायर पावर, सुरक्षा सेंसर और गतिशीलता के तालमेल की जरूरत है.
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