Countries With Most Enemies: आज की टूटी-फूटी ग्लोबल व्यवस्था में एक अकेले दुश्मन का विचार अब कई देशों पर लागू नहीं होता. कई देश खुद को एक ही समय में कई दुश्मनों से घिरा हुआ देख रहे हैं. ये देश ग्लोबल अस्थिरता के केंद्र में हैं जहां पर संघर्ष सीमा और क्षेत्र तक फैला हुआ है. आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जिनके पास सबसे ज्यादा दुश्मन हैं.

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रूस 

रूस दुनिया के सबसे भू राजनीतिक रूप से अलग-थलग देशों में से एक है. यूक्रेन के साथ उसका युद्ध पांचवें साल में प्रवेश कर गया है और यह एक लंबे संघर्ष में बदल चुका है. यूक्रेन से हटकर रूस प्रभावी रूप से नाटो गुट के साथ भी टकराव में है. हालांकि नाटो सीधे तौर पर मॉस्को के साथ युद्ध में नहीं है, रूस इस गठबंधन के 32 सदस्य देशों को दुश्मन मानता है. इन 32 देशों में अमेरिका, ब्रिटेन,पोलैंड और बाल्टिक देश शामिल हैं. इतना ही नहीं बल्कि आर्कटिक और पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव ने रूस के दुश्मनों की संख्या को और बढ़ा दिया है. 

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इजराइल 

इजराइल शायद सबसे ज्यादा सक्रिय दुश्मनों का सामना कर रहा है. इजराइल कई मोर्चों पर संघर्ष में उलझा हुआ है. गाजा में इजराइली सेना हमास के खिलाफ ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं. उत्तरी मोर्चे पर लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ झड़प तेज बनी हुई है. सीरिया में इजराइल आएदिन ईरानी संबंधित ठिकानों पर हवाई हमले करता है. इस बीच लाल सागर में यमन के हाउती विद्रोहियों ने इजरायली संबंधित शिपिंग को निशाना बनाया है.

संयुक्त राज्य अमेरिका 

संयुक्त राज्य अमेरिका कई महाद्वीपों में दुश्मनों की बढ़ती सूची का सामना कर रहा है. वेनेजुएला के साथ तनाव तेजी से बढ़ गया है. यूक्रेन को लेकर रूस, ताइवान और व्यापार को लेकर चीन, मध्य पूर्व को लेकर ईरान और परमाणु हथियारों को लेकर उत्तर कोरिया के साथ टेंशन बनी हुई है. ड्रग कार्टेल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की अमेरिकी धमकियों की वजह से मेक्सिको के साथ भी संबंध तनावपूर्ण हो चुके हैं 

चीन 

चीन का टकराव ज्यादातर रणनीतिक होते हैं. लेकिन चीन के दुश्मनों की संख्या काफी ज्यादा है. ताइवान अभी भी बड़े टकराव का केंद्र बना हुआ है. यहां चीन अपने दावों को साबित करने के लिए बड़े पैमाने पर मिलिट्री अभ्यास कर रहा है. दक्षिण चीन सागर में चीन फिलिपींस और जापान के साथ बार-बार समुद्री टकराव में उलझा हुआ है. इतना ही नहीं बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के कई देश बीजिंग को अपनी मुख्य रणनीतिक चुनौती के रूप में देखते हैं. वैसे तो चीन में कोई घोषित युद्ध नहीं लड़ा है लेकिन वह लगातार सैन्य और राजनयिक टकराव में शामिल होता है

ईरान 

ईरान शायद ही कभी सीधे युद्ध लड़ता है. लेकिन हमास हिज्बुल्लाह और हौथियों का समर्थन करके ईरान इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष रूप से संघर्ष में बना हुआ है. 2025 के क्षेत्रीय युद्ध के बाद तनाव बढ़ने से पश्चिमी शक्तियों और खाड़ी देशों के साथ ईरान का तनाव और भी ज्यादा बढ़ चुका है. इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में उसका प्रभाव उसे दुश्मनों और जवाबी गठबंधनों के लिए एक बड़े नेटवर्क के केंद्र में रखता है. 

सूडान 

सूडान इस सूची में सबसे दुखद मामलों में से एक है. यह देश सिर्फ विदेशी दुश्मनों से नहीं लड़ रहा बल्कि सुडानी सशस्त्र बल और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच एक क्रूर गृहयुद्ध में फंसा हुआ है. इस संघर्ष में क्षेत्रीय खिलाड़ी अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं. पड़ोसी देशों पर अलग-अलग गुटों का समर्थन करने का आरोप लगाया जा रहा है.

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