Voting Rules India: एक बड़ी घटना में सुप्रीम कोर्ट ने भारत में वोटिंग को अनिवार्य बनाने वाली मांग की एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने यह साफ कर दिया है कि ऐसे मामले नीतिगत फैसलों के दायरे में आते हैं ना कि न्यायिक दखल के. आइए जानते हैं कि असल में भारत में अगर वोटिंग ना करें तो क्या पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है?
वोट ना डालने पर गिरफ्तारी
भारत में आप अपना वोट ना डालने के लिए गिरफ्तार, जुर्माना या फिर किसी भी तरह से दंडित नहीं किया जा सकते. ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो वोट न डालने को अपराध मानता हो. सीधे शब्दों में कहें तो वोट ना डालना कोई अपराध नहीं है.
वोट डालना एक अधिकार
भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत 18 वर्ष से ज्यादा आयु के हर नागरिक को वोट डालने का अधिकार है. हालांकि यह एक अधिकार है ना कि कानूनी रूप से लागू करने योग्य कर्तव्य. इसका मतलब है कि आप इसका इस्तेमाल करने या फिर ना करने के लिए आजाद हैं.
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में कोई दंड नहीं
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 भारत में चुनावों को नियंत्रित करता है. जरूरी बात यह है कि इसमें वोट ना डालने को अपराध के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है. चुनावी धोखाधड़ी और कदाचार के लिए दंड हैं लेकिन चुनाव के दिन घर पर रहने के लिए नहीं.
वोट डालना पूरी तरह से स्वैच्छिक है
चुनाव आयोग नागरिकों को वोट डालने के लिए प्रोत्साहित करता है. लेकिन इसमें भागीदारी पूरी तरह से स्वैच्छिक है. कोई भी प्राधिकरण चाहे वह सरकारी हो या फिर कोई और आपको वोट डालने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. अगर आप वोट ना डालने का विकल्प चुनते हैं तो आपके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता.
नोटा का विकल्प
भले ही आप वोट डालने जाएं और आपको कोई भी उम्मीदवार पसंद ना आए तो भी आप नोटा चुन सकते हैं. इसका मतलब होता है उपरोक्त में से कोई नहीं. यह विकल्प इस विचार को पक्का करता है कि आपकी पसंद मायने रखती है. भले ही वह पसंद सभी उम्मीदवारों को खारिज करने की हो.
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