Saudi Arabia Female Workforce: सऊदी अरब में विजन 2030 सुधारों के लागू होने के बाद से रोजगार में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक महिला श्रम बल भागीदारी 34% से 36% के बीच है. 2016 में यह सिर्फ 17% थी. सऊदी जनरल अथॉरिटी फॉर स्टैटिसटिक्स के मुताबिक 12 लाख से ज्यादा महिलाओं ने औपचारिक कार्यबल में प्रवेश किया है. 

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इसमें सऊदी नागरिक और विदेशी महिलाएं दोनों ही शामिल हैं. विदेशी कामगारों में भारत, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे देशों से आई घरेलू सहायिकाएं भी शामिल हैं. इस तरह कुल संख्या में सऊदी नागरिक और काम के लिए सऊदी अरब आई विदेशी महिलाएं दोनों शामिल हैं. 

सऊदी अरब में महिला सुरक्षा 

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सऊदी अरब के संशोधित श्रम कानून में महिलाओं के लिए रोजगार संबंधी अधिकार और सुरक्षा के प्रावधान हैं. इन प्रावधान में कार्यस्थल पर उनके साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करने के नियम भी शामिल हैं. इन नियमों में रोजगार के अवसर, वेतन, सेवानिवृत्ति, सुरक्षा, मातृत्व लाभ और बच्चों की देखभाल से जुड़े विषय शामिल हैं. घरेलू कामगारों के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं. इनमें विदेशी मेड, नैनी, और रसोइया शामिल हैं. 

रोजगार संबंधी अधिकार और कार्यस्थल पर सुरक्षा 

वयस्क महिलाओं को अब नौकरी करने के लिए किसी पुरुष अभिभावक की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. कानून में वेतन के मामले में भेदभाव पर भी रोक लगाई गई है. एक ही पद या फिर समान मूल्य वाले काम के लिए पुरुषों और महिलाओं को बराबर वेतन दिया जाएगा. पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल तय की गई है. इससे दोनों लिंगों के कर्मचारियों के लिए एक समान सेवानिवृत्ति आयु तय होती है.  कार्यस्थल पर सुरक्षा भी इन नियमों का एक अहम हिस्सा है. कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाली यौन उत्पीड़न और दूसरे प्रकार के भेदभाव को रोकने के लिए यहां कड़े उत्पीड़न विरोधी कानून लागू हैं. 

मातृत्व अवकाश और पारिवारिक सहायता 

अपडेटेड लेबर रेगुलेशन के तहत पैड मैटरनिटी लीव को 10 हफ्ते से बढ़कर 12 हफ्ते कर दिया गया है. इस बदलाव से कामकाजी माता को मिलने वाली पेड छुट्टी की अवधि बढ़ गई है. यह नियम कर्मचारियों को गर्भावस्था या फिर मातृत्व अवकाश के कारण नौकरी से निकाले जाने से भी बचाता है. नियोक्ता किसी महिला को सिर्फ इस वजह से नौकरी से नहीं निकाल सकते कि वह गर्भवती है या फिर मातृत्व अवकाश पर है. बच्चों के जन्म के बाद काम पर लौटने पर एक महिला को अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए हर दिन 1 घंटे का अतिरिक्त पेट ब्रेक पानी का अधिकार है. 

इसी के साथ नियमों में यह भी बताया गया है कि नियोक्ताओं को कब चाइल्ड केयर की सुविधा देनी चाहिए. अगर किसी कंपनी में 50 या फिर उससे ज्यादा महिला कर्मचारी हैं और उन सभी के 6 साल से कम उम्र के कुल 10 या उससे ज्यादा बच्चे हैं तो कंपनी को चाइल्ड केयर या फिर क्रेच कि सुविधा देनी होगी. 

घरेलू कामगारों के लिए नियम 

घरेलू कामगारों के नियमों का उद्देश्य उनका शोषण रोकना है. तय नियमों के मुताबिक एक घरेलू कामगार से दिन में ज्यादा से ज्यादा 10 घंटे तक ही काम लिया जा सकता है. लगातार 5 घंटे काम करने के बाद नियोक्ता को कम से कम 30 मिनट का ब्रेक देना अनिवार्य है. यह ब्रेक आराम करने, खाना खाने और प्रार्थना के लिए होता है. अगर किसी कर्मचारी से 10 घंटे से ज्यादा काम लिया जाता है तो नियोक्ता को उसके लिए ओवरटाइम का भुगतान करना होगा. घरेलू कामगारों को हर दिन काम से कम 9 घंटे का लगातार आराम और हफ्ते में एक दिन की छुट्टी पाने का अधिकार है. 

यह नियम कामगारों की सुरक्षा और सम्मान की भी रक्षा करते हैं. नियोक्ता घरेलू कामगारों को खतरनाक काम के लिए मजबूर नहीं कर सकते और ना ही उन्हें किसी तीसरे पक्ष के लिए ऐसे काम करने को कह सकते हैं. 

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कामकाजी महिलाओं के लिए एक ढांचा 

सऊदी अरब में महिला कार्यबल की भागीदारी में जो बढ़ोतरी देखी गई है रोजगार के अवसरों, समान वेतन, सेवानिवृत्ति, उत्पीड़न की रोकथाम और पारिवारिक सहायता से जुड़े कानूनी बदलावों के साथ-साथ हुई है. संशोधित नियमों में घरेलू कामगारों के लिए काम के घंटे, ब्रेक और आराम को लेकर भी खास सुरक्षा उपाय तय किए गए हैं.

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