भारत के दोस्त रूस ने दावा किया है कि उसने कैंसर के खिलाफ वैक्सीन तैयार कर ली है. एंटरोमिक्स Enteromix नाम की यह वैक्सीन mRNA तकनीक पर आधारित है, यह वही तकनीक जिसे कोविड-19 वैक्सीन बनाने में भी उपयोग किया गया था. रूस की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा के अनुसार, इस वैक्सीन ने सभी प्री-क्लिनिकल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं, जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता की पुष्टि हुई है.

किस कैंसर पर करेगी काम

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका पहला लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर जिसे बड़ी आंत का कैंसर कहा जाता है होगा. यह वैक्सीन शरीर की कोशिकाओं को विशेष प्रोटीन बनाने का निर्देश देती है, जो कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्स को सक्रिय करते हैं. इम्यून रिस्पॉन्स वही प्रक्रिया है, जिससे शरीर वायरस, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों से खुद को बचाता है. यदि आगे के क्लिनिकल ट्रायल्स सफल रहते हैं, तो यह वैक्सीन कैंसर उपचार में बड़ी क्रांति साबित हो सकती है. चलिए जानें कि भारत में कौन सी कंपनियां यह काम कर रही हैं.

भारत में कौन सी कंपनियां बना रहीं वैक्सीन

सबसे बड़ी उपलब्धि हाल ही में Serum Institute of India को मिली है. पुणे स्थित इस कंपनी ने भारत की पहली स्वदेशी HPV वैक्सीन Cervix तैयार की है. यह वैक्सीन गर्भाशय ग्रीवा cervical कैंसर से बचाव करती है, जो महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है. रिपोर्ट्स की मानें तो इसकी कीमत केवल 200–400 रुपये रखी गई है, जबकि विदेशी वैक्सीन की लागत कई हजार रुपये तक होती है. सरकार ने इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया है.

APAC बायोटेक

दिल्ली की APAC Biotech ने कैंसर उपचार में एक और बड़ी सफलता हासिल की है. कंपनी ने भारत की पहली स्वीकृत डेंड्रिटिक सेल आधारित व्यक्तिगत कैंसर इम्यूनोथैरेपी APCEDEN® विकसित की है. इसे मरीज की खुद की रक्त कोशिकाओं से तैयार किया जाता है और यह ठोस ट्यूमर जैसे कैंसर में कारगर साबित हो रही है. वहीं, Indian Institute of Science IISc, बेंगलुरु ने हाल ही में एक सिंथेटिक कंपाउंड विकसित किया है, जो कैंसर वैक्सीन की प्रभावशीलता बढ़ा सकता है. यह लसीका ग्रंथियों तक दवा को पहुंचाकर एंटीबॉडी का उत्पादन तेज करता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में यह कैंसर वैक्सीन रिसर्च को नई दिशा देगा.

इसके अलावा कौन सी कंपनियां शामिल

Glenmark Pharmaceuticals की यूनिट Ichnos Glenmark Innovation भी इस दौड़ में शामिल है. कंपनी ने ISB-2001 नामक एक नई थेरेपी विकसित की है, जो मल्टीपल मायलोमा नामक खून के कैंसर के लिए है. यह फिलहाल फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल में है और इसके लिए अमेरिका की बड़ी कंपनी AbbVie से समझौता हुआ है.

इसके अलावा, ImmunoACT (IIT बॉम्बे की स्पिन-ऑफ कंपनी) ने भारत की पहली स्वदेशी CAR-T थैरेपी NexCAR 19 तैयार की है. यह खासतौर पर ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे कैंसर में कारगर है. क्लिनिकल ट्रायल में 67% मरीजों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जिनमें से आधे मरीजों में कैंसर पूरी तरह खत्म हो गया.

वहीं PGI चंडीगढ़, KEM मुंबई और ACTREC मुंबई जैसे संस्थान भी भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कैंसर दवाओं के शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल्स चला रहे हैं.

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