Railway Land Rules: कई बार खेतों के पास रेलवे की जमीन होने की वजह से कुछ लोग उस पर अस्थायी या स्थायी कब्जा कर लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रेलवे की जमीन पर बिना अनुमति कब्जा करना कानूनन अपराध है. रेलवे की जमीन सरकार की संपत्ति होती है और इस पर किसी भी तरह का गैरकानूनी कब्जा करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
रेलवे संपत्ति अधिनियम, 1966 के तहत रेलवे की संपत्ति या जमीन पर अवैध कब्जा करने, चोरी की गई रेलवे संपत्ति रखने या उससे जुड़े अपराधों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है. रेलवे मंत्रालय ने भी सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा है कि रेलवे की जमीन पर कब्जा करने वालों के लिए पुनर्वास या मुआवजे की कोई नीति नहीं है. ऐसे में अगर आपके खेत के पास रेलवे की जमीन है, तो उस पर कब्जा करने से पहले नियम जानना बेहद जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि खेत किनारे निकल रही रेलवे की जमीन पर कब्जा किया तो कितनी सजा मिलेगी.
क्या कहता है रेलवे संपत्ति अधिनियम?
रेलवे संपत्ति (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम, 1966 पूरे भारत में लागू है. इस कानून का उद्देश्य रेलवे की संपत्ति को चोरी, अवैध कब्जे और गैरकानूनी इस्तेमाल से सुरक्षित रखना है. इसके तहत रेलवे से जुड़ी किसी भी संपत्ति या जमीन पर गैरकानूनी कब्जा करना अपराध माना जाता है.
रेलवे की संपत्ति में क्या-क्या शामिल होता है?
इस कानून के अनुसार रेलवे संपत्ति में जमीन ही नहीं रेलवे प्रशासन की देखरेख या कब्जे में मौजूद पैसा, सामान, पशु और अन्य संपत्तियां भी शामिल होती हैं. अगर कोई व्यक्ति ऐसी संपत्ति को गैरकानूनी तरीके से अपने कब्जे में रखता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
रेलवे की जमीन पर कब्जा किया तो कितनी सजा मिलेगी?
अगर कोई व्यक्ति रेलवे की जमीन या रेलवे की ऐसी संपत्ति पर कब्जा करता है, जो अवैध तरीके से हासिल की गई हो या जिसके चोरी की होने का शक हो और वह यह साबित नहीं कर पाता कि वह उसके पास कानूनी तरीके से आई है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे मामले में अधिकतम 5 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है.
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कब जारी किया जाता है तलाशी वारंट?
अगर रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी को यह संदेह हो कि किसी जगह पर चोरी या गैरकानूनी तरीके से हासिल की गई रेलवे संपत्ति रखी गई है या उसकी खरीद-बिक्री हो रही है, तो वह संबंधित मजिस्ट्रेट से तलाशी वारंट की मांग कर सकता है. मजिस्ट्रेट अनुमति मिलने पर रेलवे अधिकारी उस जगह की तलाशी ले सकते हैं, रेलवे संपत्ति जब्त कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आगे की कार्रवाई कर सकते हैं.
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