Railway Budget 2026: हर साल बजट आते ही आम लोगों की नजरें रेलवे बजट पर भी टिक जाती हैं. नई ट्रेनों से लेकर किराए और सुविधाओं तक, उम्मीदों की लंबी लिस्ट होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आजादी के बाद भारत में रेलवे के लिए पहला बजट कब और किसने पेश किया था? उस दौर में देश की हालत कैसी थी, खर्च कितना हुआ और प्राथमिकताएं क्या थीं? आज जब रेल बजट आम बजट में शामिल हो चुका है, तब इतिहास के पन्नों में झांकना और भी दिलचस्प हो जाता है. आइए जानें.
आज का रेल बजट और पुरानी परंपरा
देश में आम बजट आने में कुछ ही दिन बचे हैं और अब रेलवे का बजट भी उसी का हिस्सा होता है. हालांकि कई सालों तक रेलवे का अलग बजट पेश किया जाता रहा है. रेल बजट को लेकर यात्रियों की उम्मीदें हमेशा ज्यादा रही हैं, क्योंकि भारतीय रेलवे सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी माना जाता है.
आजादी के बाद पहला रेल बजट किसने पेश किया?
स्वतंत्र भारत का पहला रेल बजट साल 1947 में पेश किया गया था. यह जिम्मेदारी निभाई थी देश के पहले रेल मंत्री जॉन मथाई ने. आजादी और विभाजन के तुरंत बाद जब देश कई चुनौतियों से जूझ रहा था, उस समय रेलवे को फिर से पटरी पर लाना सबसे बड़ी जरूरत थी. जॉन मथाई वही नेता थे, जिन्होंने बाद में वित्त मंत्री के तौर पर भी दो आम बजट पेश किए थे.
कितना था पहला रेल बजट?
1947 में पेश किया गया यह ऐतिहासिक रेल बजट कुल 126.69 करोड़ रुपये का था. आज के मुकाबले यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन उस दौर में यह देश की जरूरतों के हिसाब से एक बड़ा प्रावधान माना जाता था. रेलवे को राष्ट्रीय विकास का अहम जरिया मानते हुए इसमें खास ध्यान दिया गया.
बजट की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं
आजादी के बाद देश के बंटवारे का असर रेलवे पर साफ दिख रहा था. बजट का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के सुरक्षित परिवहन और टूटी रेल लाइनों की मरम्मत पर खर्च करने की योजना बनी. इसके साथ ही रेलवे नेटवर्क को एकजुट और मजबूत करने पर जोर दिया गया, ताकि दूर-दराज के इलाकों को देश की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके.
नई योजनाओं की शुरुआत
इसी बजट में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स की नींव रखने की योजना सामने आई, ताकि भारत अपने इंजन खुद बना सके. यात्रियों की सुविधा के लिए थर्ड क्लास डिब्बों में सुधार, पंखे लगाने और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने जैसे फैसले भी इसी दौर में लिए गए. इससे आम यात्रियों को पहली बार बदलाव महसूस हुआ.
रेल बजट की शुरुआत कैसे हुई?
रेल बजट की परंपरा आजादी से पहले शुरू हो चुकी थी. अंग्रेजी शासन में 1924 में पहली बार रेलवे का अलग बजट पेश किया गया था. यह कदम एकवर्थ कमेटी की सिफारिशों के बाद उठाया गया. उस समय सर चार्ल्स इनिस ने पहला अलग रेल बजट पेश किया था.
कब तक चला अलग रेल बजट?
आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही. संविधान सभा ने 1949 में इसे मंजूरी दी और अलग रेल बजट कई दशकों तक पेश होता रहा. आखिरकार 2016 में आखिरी बार अलग रेल बजट पेश किया गया और इसके बाद इसे आम बजट में मिला दिया गया.
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