Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी में एक बड़ा राजनीतिक विभाजन हो गया है. राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है. इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच लोगों का ध्यान राघव चड्ढा के शुरुआती राजनीतिक सफर पर गया है. आइए जानते हैं राजनीति में उनका पहला असाइनमेंट क्या था और अरविंद केजरीवाल ने उन्हें कौन सी अहम जिम्मेदारियां सौंपी थी.

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दिल्ली लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करना 

राघव चड्ढा को उनकी पहली बड़ी जिम्मेदारी 2012 में मिली थी. यह जिम्मेदारी उन्हें आम आदमी पार्टी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद दी गई थी. सिर्फ 23 साल की उम्र में उन्हें दिल्ली लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली मुख्य टीम का हिस्सा बनाया गया था. यह एक अहम भ्रष्टाचार विरोधी ढांचा था जो पार्टी की शुरुआती एजेंट की रीढ़ था. केजरीवाल ने खुद उन्हें यह काम सौंपा था. उन्होंने राघव चढ़ा के चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर पेशेवर अनुभव और मुश्किल वित्तीय व नीति से जुड़े मामलों को संभालने की उनकी काबिलियत को पहचाना था.

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2013 के चुनावी घोषणापत्र में भूमिका 

लोकपाल बिल पर काम करने के बाद चड्ढा को उस टीम में भी शामिल किया गया था जो 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी का घोषणा पत्र तैयार करने के लिए जिम्मेदार थी. इस भूमिका ने पार्टी के अंदर उनकी स्थिति को और मजबूत किया था. 

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पार्टी के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष 

2015 के दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत के बाद केजरीवाल ने राघव चड्ढा पर और भी ज्यादा भरोसा जताया. सिर्फ 26 साल की उम्र में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया. यह एक बड़ी जिम्मेदारी थी क्योंकि इसमें पार्टी के वित्त का प्रबंध करना और फंडिंग की रणनीतियों की  देखरेख करना शामिल था.

दिल्ली सरकार में सलाहकार की भूमिका 

राघव चड्ढा ने पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सलाहकार के तौर पर भी काम किया. इस भूमिका में उन्होंने नीति निर्माण में योगदान दिया. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उन्होंने अपनी भागीदारी दिखाई. वे बजट योजना और वित्तीय संरचना में शामिल थे और उन्होंने दिल्ली सरकार के कुछ अहम सुधारों को आकार देने में भी मदद की.

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