Rajya Sabha MP Removal Rules: हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है. इसके बाद लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या किसी सांसद को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से हटाया जा सकता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब और इससे संबंधित सभी संवैधानिक और कानूनी शर्तें.

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 पार्टी के पद से हटाना 

राघव चड्ढा के मामले में उन्हें सांसद के पद से नहीं हटाया गया है. उन्हें सिर्फ पार्टी के अंदर के एक पद यानी कि डिप्टी लीडर के पद से हटाया गया है. इसका मतलब है कि वह अभी भी राज्यसभा के सांसद बने हुए हैं. इससे उनके कार्यकाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि राजनीतिक पार्टियां अपने अंदर के पदों में फेर-बदल कर सकती हैं लेकिन उनके पास किसी सांसद को सीधे संसद से हटाने का अधिकार नहीं होता.

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दल-बदल विरोधी कानून 

किसी सांसद की सदस्यता जाने का एक मुख्य तरीका दल बदल विरोधी कानून के तहत है. अगर कोई सदस्य अपनी पार्टी को अपनी मर्जी से छोड़ देता है या फिर पार्टी के आधिकारिक निर्देश के खिलाफ वोट करता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है. हालांकि यह प्रक्रिया अपने आप ही नहीं होती, इसके लिए एक औपचारिक फैसले की जरूरत होती है. यह फैसला आमतौर पर राज्यसभा के सभापति द्वारा लिया जाता है. राघव चढ़ा के मामले में अभी तक ऐसी कोई भी कार्रवाई शुरू नहीं की गई है.

अयोग्यता के संवैधानिक आधार 

संविधान के अनुच्छेद 102 के तहत अगर कुछ शर्तें पूरी होती हैं तो किसी सांसद को अयोग्य घोषित किया जा सकता है. इनमें लाभ का पद धारण करना, अदालत द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित कर किया जाना, दिवालिया होना या फिर भारतीय नागरिकता को खो देना शामिल है. 

आपराधिक मामले में दोषी 

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 हटाने का एक और तरीका बताता है. इसके अनुसार अगर किसी भी सांसद को किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है और उसे 2 साल या फिर उससे ज्यादा की जेल की सजा सुनाई जाती है तो उसकी सदस्यता तुरंत ही समाप्त हो जाती है.  

सस्पेंशन और रिमूवल में अंतर 

राज्यसभा के सदस्यों को दुर्व्यवहार के लिए सस्पेंशन का सामना भी करना पड़ सकता है. यह सदन के सभापति द्वारा किया जाता है और इसके तहत सांसद को एक तय अवधि के लिए सदन की कार्यवाही में भाग लेने से रोक दिया जाता है. हालांकि सस्पेंशन का मतलब पूरी तरह से रिमूवल नहीं होता है. सांसद अपनी सीट पर बने रहते हैं और सस्पेंशन की अवधि समाप्त होने के बाद वापस आ जाते हैं. राघव चड्ढा को खुद 2023 में सस्पेंशन का सामना करना पड़ा था और इससे उनकी सदस्यता पर कोई भी असर नहीं पड़ा था.

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