PM Modi Convoy: पश्चिम एशिया के गहराते संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी मिसाल पेश की है. देशवासियों से तेल बचाने की अपील करने के बाद उन्होंने खुद के सुरक्षा काफिले में गाड़ियों की संख्या को आधा करने का निर्देश दिया है. यह कदम न केवल फिजूलखर्ची रोकने वाला है, बल्कि वीवीआईपी कल्चर पर एक कड़ा प्रहार भी है. अब प्रधानमंत्री के साथ-साथ कई केंद्रीय मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपने कारकेड को छोटा करने की तैयारी में हैं. लेकिन इसी क्रम में पहले यह जान लेते हैं कि उनके काफिले में कौन-कौन सी गाड़ियां चलती हैं और हर गाड़ी का क्या रोल है.

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काफिले में कटौती की पहल

प्रधानमंत्री मोदी ने तेल की बचत और संसाधनों के सही इस्तेमाल का संदेश देने के लिए अपने सुरक्षा घेरे में बदलाव की शुरुआत की है. उनके इस फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई बड़े नेताओं ने भी अपने काफिले को आधा करने की बात कही है. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट मंडरा रहा है. प्रधानमंत्री का यह निर्देश स्पष्ट करता है कि सुरक्षा और मितव्ययिता के बीच संतुलन बनाना संभव है.

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ब्लू बुक के सुरक्षा नियम

प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा खाका गृह मंत्रालय की ब्लू बुक में दर्ज होता है. यह एक अत्यंत गोपनीय दस्तावेज है, जिसमें वीवीआईपी की सुरक्षा के हर पहलू का विवरण होता है. एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) इसी ब्लू बुक के नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री का कारकेड तैयार करती है. इसमें गाड़ियों की संख्या खतरे के स्तर, लोकेशन और कार्यक्रम के स्थल के आधार पर तय की जाती है. प्रधानमंत्री कहीं भी जाएं, उनकी सुरक्षा में तैनात हर अधिकारी और गाड़ी की भूमिका पहले से ही सुनिश्चित होती है.

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वर्तमान में काफिले में कितनी गाड़ियां?

सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के काफिले में कम से कम 18 मुख्य गाड़ियां होती हैं. इसके अलावा यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए 6 से 8 अतिरिक्त गाड़ियां साथ चलती हैं. कुल मिलाकर लगभग 24 गाड़ियों का यह लश्कर प्रधानमंत्री की सुरक्षा को अभेद्य बनाता है. इस काफिले में पायलट कार, एस्कॉर्ट वाहन, जैमर गाड़ी और एंबुलेंस जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल होते हैं. अब इसी संख्या को घटाकर सीमित करने की योजना पर काम किया जा रहा है.

अभेद गाड़ियों का किला है पीएम का काफिला

प्रधानमंत्री मोदी के काफिले की सबसे महत्वपूर्ण गाड़ी मर्सिडीज-मेबैक एस 650 गार्ड है. इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित कारों में गिना जाता है और इसे वीआर-10 रेटिंग प्राप्त है. यह कार किसी चलते-फिरते बंकर से कम नहीं है, जिस पर एके-47 की गोलियों और हैंड ग्रेनेड का कोई असर नहीं होता. यदि गाड़ी से महज दो मीटर की दूरी पर 15 किलो टीएनटी का ब्लास्ट भी हो जाए, तो भी अंदर बैठा व्यक्ति सुरक्षित रहता है. गैस हमले की स्थिति में इसमें अलग से ऑक्सीजन सप्लाई की सुविधा भी मौजूद है.

सुरक्षा का आधुनिक तकनीकी तंत्र

काफिले में शामिल जैमर गाड़ी का रोल सबसे अहम होता है. इस गाड़ी के ऊपर कई एंटीना लगे होते हैं, जिनका काम आसपास के रेडियो सिग्नल्स को ठप करना होता है, ताकि कोई रिमोट कंट्रोल बम सक्रिय न किया जा सके. इसके अलावा काफिले में रेंज रोवर सेंटिनल, टोयोटा लैंड क्रूजर और बीएमडब्ल्यू-7 सीरीज जैसी बख्तरबंद गाड़ियां भी शामिल रहती हैं. एसपीजी के कमांडो इन गाड़ियों में सवार होकर प्रधानमंत्री की मुख्य कार को चारों तरफ से घेरकर चलते हैं.

भ्रम पैदा करने वाली डमी कारें

सुरक्षा रणनीतियों के तहत प्रधानमंत्री के काफिले में एक जैसी दिखने वाली दो से तीन गाड़ियां चलती हैं. अंतिम समय तक यह गोपनीय रखा जाता है कि प्रधानमंत्री किस गाड़ी में बैठेंगे. यह डिकॉय रणनीति हमलावरों को भ्रमित करने के लिए अपनाई जाती है. अगर प्रधानमंत्री किसी दूसरे राज्य के दौरे पर होते हैं, तो वहां की स्थानीय पुलिस की गाड़ियां और स्पेयर कारें भी काफिले का हिस्सा बन जाती हैं, जिससे गाड़ियों की कुल संख्या और बढ़ जाती है.

संसद दौरे पर छोटा कारकेड

जब प्रधानमंत्री संसद भवन जाते हैं, तो उनके काफिले का स्वरूप काफी छोटा होता है. चूंकि संसद परिसर खुद में एक उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है, इसलिए वहां भारी-भरकम गाड़ियों के लश्कर की आवश्यकता नहीं होती है. हालांकि, छोटा काफिला होने के बावजूद सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाता है. जैमर और अनिवार्य सुरक्षा वाहन तब भी साथ होते हैं, ताकि सुरक्षा घेरा हर पल मजबूत बना रहे.

आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था

काफिले के साथ हमेशा एक अत्याधुनिक एंबुलेंस चलती है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में प्रधानमंत्री को तुरंत उपचार मिल सके. इस एंबुलेंस में तमाम जीवन रक्षक उपकरण और विशेषज्ञ मौजूद होते हैं. प्रधानमंत्री का काफिला सिर्फ गाड़ियों का समूह नहीं, बल्कि एक गतिशील सुरक्षा तंत्र है जो हर तरह के खतरे से निपटने के लिए 24 घंटे तैयार रहता है.

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