Sikkim Tax Exemption: सिक्किम भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां के मूल निवासियों को अपनी कमाई पर इनकम टैक्स के तौर पर एक भी रुपया नहीं देना पड़ता. चाहे उनकी सालाना इनकम लाखों में हो या फिर करोड़ों में इसका कोई भी फर्क नहीं पड़ता. यह अनोखी टैक्स छूट अक्सर पूरे देश के लोगों को हैरान कर देती है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में आमतौर पर पूरे देश के लिए एक जैसा इनकम टैक्स ढांचा लागू है.
भारत में शामिल होने से पहले सिक्किम के टैक्स कानून
भारत का हिस्सा बनने से पहले सिक्किम लगभग 330 सालों तक एक स्वतंत्र रियासत के तौर पर काम करता रहा. इस दौरान उसने अपना खुद का टैक्स ढांचा बनाए रखा. इसे सिक्किम इनकम टैक्स मैनुअल 1948 के नाम से जाना जाता था.
जब 16 मई 1975 को सिक्किम आधिकारिक तौर पर भारत का 22वां राज्य बना तब विलय समझौते में कुछ खास शर्तें शामिल की गई थी. इनमें से सबसे अहम शर्त यह थी कि सिक्किम के मौजूदा कानून और पारंपरिक टैक्स व्यवस्था सुरक्षित बनी रहेगी.
अनुच्छेद 371F की सुरक्षा
सिक्किम की अनोखी स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 371F जोड़ा गया. यह संवैधानिक प्रावधान उन कई कानून और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुरक्षा देता है जो सिक्किम के भारत में विलय से पहले वहां मौजूद थी. यही वजह है कि राज्य को कुछ ऐसे खास अधिकार दिए गए जो देश के किसी और हिस्से में उपलब्ध नहीं है.
पूरी तरह से इनकम टैक्स में छूट
इस छूट को इनकम टैक्स अधिनियम 1961 की धारा 10(26AAA) के तहत भी मान्यता दी गई है. इस प्रावधान के तहत सिक्किम के मूल निवासियों को राज्य के अंदर मिलने वाली सैलरी, बिजनेस से होने वाली इनकम, डिविडेंड और ब्याज से होने वाली कमाई पर इनकम टैक्स देने से छूट मिली हुई है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी पात्र निवासी की इनकम करोड़ों में भी हो तब भी प्रावधानों के तहत उसे कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता.
हर जगह नहीं मिलता फायदा
दरअसल यह छूट सिक्किम में रहने वाले हर व्यक्ति को नहीं मिलती. यह फायदा सिर्फ सिक्किम के मूल निवासी और उनके वंशजों पर ही लागू होता है. जिनके नाम 26 अप्रैल 1975 से पहले आधिकारिक सिक्किम सब्जेक्ट रजिस्टर्ड में दर्ज थे उन्हें ही यह फायदा मिलता है. बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद यह छूट कुछ ऐसे लंबे समय से बसे भारतीय निवासियों को भी दी गई जो इस तय तारीख से पहले सिक्किम में हमेशा के लिए बस गए थे.
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बाहर वालों के लिए टैक्स
अगर कोई व्यक्ति आज किसी दूसरे भारतीय राज्य से नौकरी, बिजनेस या फिर रहने के लिए सिक्किम आता है तो उसे अपने आप यह छूट नहीं मिलती. ऐसे लोगों को आम भारतीय टैक्स कानून के हिसाब से इनकम टैक्स देना पड़ता है.
दूसरे टैक्स अभी भी देने पड़ते हैं
हालांकि जो निवासी छूट के हकदार है उन्हें इनकम टैक्स से छूट मिली हुई है लेकिन उन्हें सभी तरह की टैक्स से पूरी तरह छूट नहीं मिली है. सिक्किम के लोगों को अभी भी जीएसटी, प्रॉपर्टी टैक्स और भारतीय कानून के तहत लागू होने वाले कई दूसरे टैक्स देने पड़ते हैं.
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