Para Special Forces Women Recruitment : आज के टाइम में महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं. महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति और अंतरिक्ष से लेकर सुरक्षा बलों तक अपनी मजबूत और खास मौजूदगी बनाई हुई है. भारतीय सशस्त्र बलों में भी पिछले कुछ सालों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है. अब महिलाएं फाइटर पायलट बन रही हैं, युद्धपोतों पर तैनात हो रही हैं और सेना में स्थायी कमीशन भी हासिल कर रही हैं. 

Continues below advertisement

इसके बाद भी भारतीय सेना की एक ऐसी प्रतिष्ठित और बेहद खतरनाक यूनिट है, जहां महिलाओं की भर्ती अभी भी नहीं होती है. यह यूनिट  पैरा स्पेशल फोर्सेज (Para SF) है, जिसे भारतीय सेना के सबसे मुश्किल और खतरनाक विशेष बलों में गिना जाता है. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब महिलाएं सेना के कई अहम पदों पर काम कर रही हैं तो फिर पैरा कमांडो क्यों नहीं बन सकती हैं. तो आइए आज जानते हैं  देश की इस आर्मी में महिलाएं भर्ती क्यों नहीं हो सकती हैं और इसके पीछे की वजह क्या है.  क्या है पैरा स्पेशल फोर्सेज? पैरा स्पेशल फोर्सेज भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट का खास हिस्सा है. इस यूनिट के जवानों को देश के सबसे मुश्किल और खतरनाक मिशनों पर भेजा जाता है. इन कमांडो का काम आतंकवाद विरोधी अभियान चलाना, दुश्मन के इलाके में गुप्त ऑपरेशन करना, बंधकों को सुरक्षित छुड़ाना, विशेष सैन्य मिशनों को अंजाम देना और युद्ध के दौरान रणनीतिक कार्रवाई करना होता है. पैरा एसएफ के सैनिकों को बेहद मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. यही कारण है कि इसे सेना की सबसे प्रतिष्ठित यूनिटों में गिना जाता है.  देश की इस आर्मी में महिलाएं भर्ती क्यों नहीं हो सकती हैं?

नियमों के अनुसार भारतीय सेना में महिलाओं को अभी भी कुछ युद्धक शाखाओं में सीधी भर्ती की अनुमति नहीं है. पैरा स्पेशल फोर्सेज भी उन्हीं लड़ाकू शाखाओं का हिस्सा है. कोई महिला अधिकारी या जवान सीधे पैरा एसएफ कमांडो नहीं बन सकती है. हालांकि वे सेना की अन्य कई शाखाओं में जरूरी जिम्मेदारियां निभा सकती हैं.

Continues below advertisement

यह भी पढ़ें -Special Protection Group: हमले की कोशिश और दुश्मन को वहीं भून देगी SPG, जानिए कितनी खतरनाक है पीएम की सुरक्षा फोर्स इसके पीछे की वजह क्या है? पैरा स्पेशल फोर्सेज में चयन सेना की सबसे मुश्किल प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है. उम्मीदवारों को लंबी दूरी तक दौड़ना पड़ता है. भारी वजन के साथ मार्च करना पड़ता है. कई दिनों तक बिना आराम के प्रशिक्षण लेना पड़ता है. साथ ही मानसिक दबाव में निर्णय लेने की क्षमता साबित करनी पड़ती है. जंगल, पहाड़ और रेगिस्तान जैसी मुश्किल परिस्थितियों में जिंदा रहने का प्रशिक्षण लेना पड़ता है. कहा जाता है कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले ज्यादातर उम्मीदवार बीच में ही बाहर हो जाते हैं और बहुत कम लोग अंतिम रूप से सफल हो पाते हैं.

सेना में महिलाएं किन भूमिकाओं में सेवा दे रही हैं?

भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है. वर्तमान में महिलाएं कई जरूरी क्षेत्रों में सेवा दे रही है. जिसमें महिला अधिकारी और डॉक्टर सैनिकों को मेडिकल सुविधाएं दे रही हैं और युद्धकाल में भी जरूरी जिम्मेदारी निभाती हैं. इसके अलावा सिग्नल कोर में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यों में महिलाएं जरूरी भूमिका निभा रही हैं. साथ ही लॉजिस्टिक्स और प्रशासन में सेना के संचालन के लिए जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं को संभालने का काम भी महिलाएं कर रही हैं. कई तकनीकी शाखाओं में महिला अधिकारी अपनी सेवाएं दे रही हैं और सेना की ताकत बढ़ा रही हैं. 

यह भी पढ़ें -Beating Retreat Ceremony: भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर ही क्यों होती है 'बीटिंग रिट्रीट', चीन या बांग्लादेश बॉर्डर पर क्यों नहीं?