TTP Air Force: आतंकवादी समूह अक्सर अपनी ताकत को दिखाने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कोई आतंकवादी संगठन सच में अपनी खुद की एयर फोर्स बना सकता है? दरअसल हाल ही में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने कथित तौर पर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपनी जमीनी सेना के साथ-साथ एक एयरफोर्स बनाने की भी बात की है. आइए जानते हैं कि क्या ऐसा सच में हो सकता है.
कौन देगा मान्यता
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सिर्फ संप्रभु देश ही आधिकारिक तौर पर एयर फोर्स चलाने की इजाजत रखते हैं. मिलिट्री एविएशन सीधे के तौर पर राष्ट्रीय संप्रभुता और हवाई क्षेत्र के कंट्रोल से जुड़ा हुआ है. ग्लोबल एवियशन नियमों को इंटरनेशनल सिविल एवियशन ऑर्गेनाइजेशन कंट्रोल करता है, जो इस बात को जरूरी करता है कि हर विमान एक मान्यता प्राप्त देश के तहत रजिस्टर्ड होना चाहिए. आतंकवादी संगठन गैर सरकारी संगठन होते हैं और उनके पास कोई भी मान्यता नहीं होती. यही वजह है कि वे कानूनी तौर पर मिलिट्री विमान के मालिक नहीं हो सकते, उन्हें रजिस्टर नहीं कर सकते हैं और उन्हें चला ही नहीं सकते.
क्या आतंकवादी समूह फाइटर जेट खरीद सकता है
मिलिट्री विमान की बिक्री दुनिया भर में सख्ती से नियंत्रित की जाती है. फाइटर जेट या फिर हेलीकॉप्टर निर्यात करने वाले किसी भी देश या फिर रक्षा निर्माता को एंड यूजर सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. इस सर्टिफिकेट से यह पक्का होता है कि खरीदार एक वैध सरकार है. अब क्योंकि आतंकवादी समूह मान्यता प्राप्त संस्थाएं नहीं होती इस वजह से कोई भी देश उन्हें आधिकारिक तौर पर लड़ाकू विमान नहीं बेच सकता.
यही वजह है कि आतंकवादी संघर्षों के दौरान विमान पर कब्जा करके उन तक पहुंच हासिल कर लेते हैं. 2021 में काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने अफगान एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर और विमान पर कब्जा कर लिया था. बीते कुछ सालों में कई समूहों ने कमर्शियल ड्रोन का इस्तेमाल किया है. उन्होंने उन ड्रोन को निगरानी या विस्फोटक हमले के लिए मॉडिफाई किया है.
आतंकवादी समूह को कौन देगा इजाजत
कोई भी इंटरनेशनल संस्था या फिर कानूनी अथॉरिटी आतंकवादी संगठनों को हवाई ताकत को ऑपरेट करने की इजाजत नहीं देती है. उन्हें जो भी ट्रेनिंग, उपकरण या फिर पार्ट्स मिलते हैं वह गुप्त नेटवर्क, ब्लैक मार्केट या आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप झेल रहे देशों के कथित समर्थन से आते हैं.
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