Nepal Helicopter Crash: नेपाल के सोलुखुम्बु जिले में माउंट एवरेस्ट बेस कैंप के पास फेरिचे हेलिप्याड पर दो हेलिकॉप्टर्स के बीच हुई खौफनाक टक्कर ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. लैंडिंग के दौरान फिशटेल एयर और एयर डायनेस्टी के हेलिकॉप्टर्स के रोटर ब्लेड आपस में टकरा गए.इस दर्दनाक हादसे में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई और दोनों पायलटों सहित तीन लोग घायल हो गए.
नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण CAAN के अनुसार, यह हादसा उस इलाके में हुआ जो लुक्ला एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर के कवरेज क्षेत्र से बाहर है, जहां पायलटों को आपस में बातचीत कर दूरी तय करनी होती है. इस घटना के बाद विमानन सुरक्षा और हवा में दो हेलिकॉप्टर्स के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के नियमों पर गंभीर बहस छिड़ गई है.
हवा में कितनी दूरी रखना है जरूरी?
अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन DGCA के मानकों के अनुसार, हवा में उड़ते समय दो विमानों या हेलिकॉप्टर्स के बीच एक निश्चित दूरी का होना अनिवार्य है. सामान्य परिस्थितियों में, दृश्य उड़ान नियमों के तहत उड़ रहे दो हेलिकॉप्टर्स के बीच कम से कम 500 फीट की ऊर्ध्वाधर दूरी होनी चाहिए. हालांकि विमानन का सबसे बुनियादी नियम यह है कि जब तक कोई हेलीपैड या रनवे का लैंडिंग जोन पूरी तरह से खाली नहीं हो जाता और पहला विमान वहां से सुरक्षित हट नहीं जाता, तब तक दूसरा विमान या हेलीकॉप्टर वहां लैंड नहीं कर सकता. दोनों को एक साथ एक ही जगह पर नीचे आने की अनुमति बिल्कुल नहीं होती है.
वहीं, अगर वे एक ही ऊंचाई पर आगे-पीछे उड़ रहे हैं, तो उनके बीच कम से कम 1.8 से 3.7 किलोमीटर की क्षैतिज दूरी का फासला होना जरूरी माना जाता है.एयरपोर्ट या हेलिप्याड के नजदीक आने पर यह दूरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन वहां सख्त ट्रैफिक नियमों का पालन करना होता है.
हेलिप्याड पर लैंडिंग के कड़े नियम
जब दो हेलिकॉप्टर किसी एक ही हेलिप्याड पर लैंड करने के लिए आगे बढ़ते हैं, तो उनके लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल और कड़े हो जाते हैं. विमानन नियमों के मुताबिक, किसी भी छोटे या सीमित आकार के हेलिप्याड पर दो हेलिकॉप्टर्स को एक साथ या एक ही समय में लैंड करने की अनुमति बिल्कुल नहीं होती.
जब तक पहला हेलिकॉप्टर सुरक्षित रूप से लैंड करके अपने ब्लेड पूरी तरह बंद नहीं कर लेता या वहां से हट नहीं जाता, तब तक दूसरे हेलिकॉप्टर को हवा में ही होल्डिंग पैटर्न में रहना पड़ता है. इस दौरान दोनों के बीच कम से कम 30 से 50 मीटर की सुरक्षित ग्राउंड क्लियरेंस दूरी होनी चाहिए, ताकि उनके विशाल रोटर ब्लेड्स आपस में कभी न छुएं.
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कैसे रखा जाता है सुरक्षित फासला?
आसमान में हेलिकॉप्टर्स के बीच फासला बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी एयर ट्रैफिक कंट्रोल की होती है, जो रडार और रेडियो संचार के जरिए पायलटों को गाइड करते हैं. लेकिन नेपाल के पहाड़ी और सुदूर इलाकों जैसे अन-कंट्रोल्ड एयरस्पेस में पूरी जिम्मेदारी खुद पायलटों की होती है. ऐसे इलाकों में पायलट ब्लाइंड ट्रांसमिशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं.
इसके तहत वे रेडियो फ्रीक्वेंसी पर लगातार अपनी लाइव लोकेशन, ऊंचाई और लैंडिंग के इरादे की घोषणा करते रहते हैं ताकि आसपास उड़ रहे दूसरे पायलट सावधान हो सकें. इसके अलावा आधुनिक हेलिकॉप्टर्स में ट्रैफिक कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम लगा होता है, जो पास में किसी दूसरे एयरक्राफ्ट के आने पर पायलट को ऑडियो अलर्ट देकर सचेत कर देता है.
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