Murasu Cyclone: हाल ही में देश ने अर्नब तूफान के भारी तबाही वाले मंजर को देखा ही था कि एक हफ्ते के भीतर ही मुरासु चक्रवात ने अपनी दस्तक दे दी है. महज सात दिनों के भीतर दो तूफानों के आने से मौसम विभाग और आम जनजीवन दोनों पूरी तरह सतर्क हो गए हैं. 1 नवंबर से ही बंगाल की खाड़ी से सटे तटीय क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश और भयंकर हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है और कई राज्यों में ठंड समय से पहले ही काफी बढ़ गई है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर एक साइक्लोन को बनने में आखिर कितना समय लगता है, जो एक हफ्ते में ही दो तूफान आ गए.
तूफानों की ताबड़तोड़ दस्तक
मौसम विभाग के मुताबिक पिछले सात दिनों के भीतर एक के बाद एक आए इन दोनों तूफानों ने तटीय इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं. तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्से, तेलंगाना, दक्षिणी ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी जारी कर दी गई है. इस चक्रवाती असर से देश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है, जिससे लोगों को अचानक से कड़ाके की ठंड और तेज हवाओं का सामना करना पड़ रहा है.
चक्रवात बनने की पूरी प्रक्रिया क्या है?
समुद्र के ऊपर बादलों, नमी और हवा का एक विशाल घूमता हुआ चक्र चक्रवात कहलाता है. इसकी मुख्य शुरुआत तब होती है जब महासागर की सतह पर हवा का दबाव अचानक बहुत कम हो जाता है और आसपास की ठंडी हवा उस खाली जगह को भरने के लिए तेजी से दौड़ती है. इस प्रक्रिया के लिए जरूरी है कि समुद्र का पानी लगभग 50 मीटर की गहराई तक कम से कम 26.5 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो, जो बाद में भाप बनकर ऊपर उठता है.
यह भी पढ़ें: Cyclone Murasu: किस तरह नापी जाती है तूफान की चाल, कैसे तय होता है रास्ता?
नमी और भाप का खेल
समुद्र का गर्म पानी जब भाप बनकर ऊपर की तरफ जाता है, तो वह नम हवा में बदलकर वायुमंडल में ऊंचाई पर पहुंच जाता है. वहां जाकर यह नमी ठंडी होती है और बारिश वाले भारी बादलों का रूप ले लेती है, जिससे भारी मात्रा में गर्मी बाहर निकलती है. इस गर्मी के कारण उस जगह पर हवा का दबाव और अधिक गिर जाता है, जिससे बाहर की और हवाएं तेजी से केंद्र की तरफ खिंची चली आती हैं.
ऊपरी हवाओं के शांत रहने का तूफान पर असर
किसी भी चक्रवात को पूरी तरह तैयार होने के लिए कम विंड शियर यानी ऊपरी वायुमंडल में हवाओं का शांत होना बेहद जरूरी होता है. तूफान के ऊपरी हिस्से में हवा की रफ्तार ज्यादा तेज नहीं होनी चाहिए और न ही उसकी दिशा समुद्र तल के पास चलने वाली हवाओं के विपरीत होनी चाहिए. यदि ऊपरी हवाएं बहुत अधिक वेग से बहती हैं, तो वे बनने वाले तूफान के पूरे ढांचे को शुरुआती दौर में ही छिन्न-भिन्न कर देती हैं.
एक चक्रवात कितने दिन में बनता है?
सामान्य तौर पर एक पूरी तरह विकसित उष्णकटिबंधीय चक्रवात को अपने शुरुआती निम्न दबाव क्षेत्र से एक गंभीर तूफान बनने में 3 से 5 दिन का वक्त लगता है. यह पूरा घटनाक्रम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ता है, जिसमें पहले 24 से 48 घंटों में समुद्र के ऊपर गर्म हवाएं उठकर कम दबाव का घेरा तैयार करती हैं और फिर हवाएं तेजी से गोल घूमने लगती हैं.
चक्रवात बनने से पहले कितनी तेज होती है हवा की रफ्तार?
शुरुआती कम दबाव के बाद अगले एक से दो दिनों में हवाओं की रफ्तार तेज होती है और इसे डिप्रेशन का रूप माना जाता है. जब हवा की गति प्रति घंटे 62 किलोमीटर या उससे अधिक हो जाती है, तब यह आधिकारिक रूप से चक्रवात बन जाता है. इस दौरान समुद्र से लगातार मिलने वाली ऊर्जा और भाप इस तूफान को कुछ ही दिनों में एक अत्यंत भीषण और खतरनाक चक्रवात में बदल देती है.
तूफान पर अल-नीनो और जलवायु का असर
इस साल सक्रिय सुपर अल-नीनो की वजह से बंगाल की खाड़ी के ऊपरी सतह का तापमान अट्ठाईस से तीस डिग्री तक पहुंच गया है. प्रशांत महासागर की यह गर्म जलवायु स्थिति चक्रवातों के लिए एक तरह के ईंधन का काम करती है, जो तूफानों की ताकत और उनकी रफ्तार को कई गुना ज्यादा बढ़ा देती है. वैज्ञानिकों के लंबे शोध बताते हैं कि अल-नीनो के वर्षों में भले ही चक्रवात कम आते हैं, लेकिन उनकी तीव्रता और भयंकरता सामान्य से बहुत अधिक होती है.
यह भी पढ़ें: Florida Business Jet Crash: 35 हजार फीट ऊपर कैसे जमती है बर्फ, इससे हवाई जहाज को कितनी होती है दिक्कत?
