गर्मियों की तपिश के बाद जैसे ही मानसूनी हवाएं दस्तक देती हैं तो आसमान का मिजाज पूरी तरह से बदल जाता है. कभी रूई के गोलों जैसे सफेद बादल तैरते दिखाई देते हैं, तो कभी घने काले बादलों का डेरा जम जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आसमान में दिखने वाले हर बादल का स्वभाव, रूप और ऊंचाई अलग होती है? मौसम विज्ञान के नजरिए से कुछ बादल बेहद शांत होते हैं, जबकि कुछ बादल अपने भीतर तबाही का ऐसा बवंडर समेटे हुए होते हैं, जो कि पल भर में सबकुछ तबाह कर सकता है. चलिए जानें कि तबाही वाले बादल कौन से होते हैं और भारत में कहां पर उनका कहर दिखता है.
आसमान में बादलों के विभिन्न प्रकार
आसमान में छाने वाले बादलों को मुख्य रूप से उनकी बनावट और काम के आधार पर बांटा जाता है. इनमें प्रमुख रूप से क्यूम्यलोनिंबस, निम्बोस्ट्रेटस, स्ट्रेटस, क्यूम्यलस और ऑल्टोस्ट्रेटस शामिल हैं. इनमें से हर एक बादल की अपनी अलग ऊंचाई होती है और वे अलग-अलग तरह के मौसम का संकेत देते हैं. कुछ बादलों से हल्की बूंदाबांदी होती है तो वहीं कुछ बादल घंटों तक लगातार बरसते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो कि बिजली और ओलों के साथ भारी तबाही लेकर आते हैं.
सबसे घातक तबाही मचाने वाला बादल कौन सा?
बादलों के इस परिवार में सबसे खतरनाक और शक्तिशाली नाम क्यूम्यलोनिंबस का है, जिनको विज्ञान की भाषा में थंडरस्टॉर्म क्लाउड भी कहा जाता है. ये बेहद घने और काले रंग के होते हैं, जो कि आसमान में सबसे ज्यादा ऊंचाई तक फैले होते हैं. जब भी अचानक बिना किसी चेतावनी के मूसलाधार बारिश होने लगे, आसमान में बिजली कड़कने लगे और ओले गिरने लगें, तो समझ जाइए कि आसमान में यही बादल छाए हैं. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इन बादलों को देखते ही किसानों और खुले में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए.
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लगातार रिमझिम फुहारें बरसाने वाले बादल
अगर आसमान में सूरज पूरी तरह से छिप गया हो और लगातार कई घंटों या दिनों तक मध्यम गति से बारिश हो रही हो, तो इसके पीछे निम्बोस्ट्रेटस और ऑल्टोस्ट्रेटस बादल शामिल होते हैं. ये बादल जमीन से करीब 2500 से 3000 मीटर की ऊंचाई पर बनते हैं और पूरे आसमान को एक चादर की तरह से ढंक लेते हैं, जिसे मौसम विभाग ओवरकास्ट कंडीशन कहता है. इनमें तेज आंधी-तूफान तो नहीं आता है, लेकिन ये लगातार बरसकर नदी-नालों को पानी से भर देते हैं और मौसम को लंबे वक्त तक ठंडा रखते हैं.
सिर्फ मानसून में नजर आने वाले स्ट्रेटस बादल
स्ट्रेटस ऐसे अनोखे बादल हैं जो कि साल के पूरे 12 महीनों में से केवल मानसून के 4 महीनों के दौरान ही आसमान में दिखाई देते हैं. हल्के काले रंग के ये बादल जमीन से बहुत ही कम ऊंचाई, यानी महज 100 से 300 मीटर की दूरी पर तैरते हैं. जब आप आसमान की तरफ देखेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे ये बहुत तेजी से दौड़ लगा रहे हैं. चूंकि इनमें नमी की मात्रा बहुत अधिक होती है, इसलिए ये बहुत घने दिखते हैं और मानसून के सीजन में कहीं न कहीं पानी जरूर बरसाते हैं.
साल के बारह महीने दिखने वाले बादल
कुछ बादल ऐसे होते हैं, जो किसी खास मौसम के मोहताज नहीं होते हैं और साल के 12 महीने आसमान में दिखाई देते हैं. इनको क्यूम्यलस कहा जाता है. आमतौर पर ये रोजाना सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच हवा में मौजूद नमी की वजह से बनते हैं और सफेद रुई के ढेर जैसे दिखते हैं. हालांकि जब कभी स्थानीय मौसम में कोई बड़ा बिगाड़ आता है, तो यही क्यूम्यलस बादल धीरे-धीरे बदलकर निम्बोस्ट्रेटस का रूप ले लेते हैं और अचानक तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश का कारण बन जाते हैं.
भारत के किन हिस्सों में तबाही मचाते हैं ये बादल?
भारत की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां अलग-अलग हिस्सों में इन बादलों का भयानक तांडव देखने को मिलता है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में जब क्यूम्यलोनिंबस बादल अचानक फटते हैं, तो भीषण बाढ़ और भूस्खलन से तबाही मच जाती है. वहीं पूर्वोत्तर भारत के असम और मेघालय में भारी मानसूनी बादलों के कारण हर साल नदियां उफान पर आ जाती हैं. इसके अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में तूफानी बादलों के टकराने से चक्रवात और भारी तबाही का खतरा हमेशा बना रहता है.
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