महाराष्ट्र सरकार ने धर्मांतरण को लेकर एक नया विधेयक पेश किया है, जिसे धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 कहा जा रहा है. इस विधेयक में कुछ नए और स्पष्ट प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनमें बच्चों के धर्म से जुड़ा नियम भी शामिल है. महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराया जाता है और बाद में उस दंपत्ति का बच्चा पैदा होता है, तो उस बच्चे का धर्म वही माना जाएगा जो उसकी मां का विवाह से पहले था. इसके अलावा इस विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर भी सख्त नियम रखे गए हैं.
भारत जैसे विविधताओं वाले देश में धर्म का विषय हमेशा से बहुत संवेदनशील रहा है. यहां अलग-अलग राज्यों में धर्मांतरण कानून के नियम और सजा की अवधि अलग-अलग है. कुछ राज्यों में यह कानून काफी सख्त है, जहां लंबे समय की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है. ऐसे में आइए जानते हैं कि देश के किन-किन राज्यों में धर्मांतरण कानून अलग से है और सबसे कड़ी सजा कहां मिलती है.
महाराष्ट्र के प्रस्तावित कानून में क्या खास है
महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है तो उसे धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी. धर्म परिवर्तन के बाद भी उसे एक पोस्ट-कन्वर्जन डिक्लेरेशन देना जरूरी होगा. अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. कुछ गंभीर मामलों में यह सजा 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक जुर्माना भी हो सकती है.
देश के किन-किन राज्यों में धर्मांतरण कानून अलग से है
भारत में कई राज्य ऐसे हैं जहां पहले से ही जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन रोकने के लिए कानून लागू हैं, इनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं. इन राज्यों में बनाए गए कानूनों का मकसद यह है कि किसी भी व्यक्ति को दबाव, धोखा, लालच या शादी के जरिए धर्म बदलने के लिए मजबूर न किया जाए.
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सबसे कड़ी सजा कहां मिलती है
धर्मांतरण को लेकर सबसे कड़े कानूनों में से एक उत्तर प्रदेश में लागू है. यहां उत्तर प्रदेश विधि-विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 लागू किया गया था, जिसे बाद में 2024 में संशोधित करके और सख्त बना दिया गया. इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे 14 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. अगर पीड़ित नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हो तो सजा और बढ़ जाती है. ऐसे मामलों में आरोपी को 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है. खास बात यह है कि इन मामलों को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है.
राजस्थान में भी प्रस्तावित है सख्त कानून
राजस्थान में भी राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 का मसौदा तैयार किया गया है. इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति जबरन, धोखे से या शादी के जरिए किसी का धर्म बदलवाता है तो उसे 7 से 14 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है. अगर पीड़ित नाबालिग लड़की या अनुसूचित जाति/जनजाति से संबंधित हो, तो सजा और भी बढ़ जाती है. ऐसे मामलों में 10 से 20 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं अगर किसी मामले में सामूहिक धर्मांतरण कराया जाता है, तो आरोपी को 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.
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