Chicken Neck Corridor: भारत सरकार सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आस-पास कनेक्टिविटी और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली पानी के अंदर बनने वाली टि्वन ट्यूब टनल बनाने की तैयारी कर रही है. इस प्रोजेक्ट का मकसद पूर्वोत्तर तक पहुंच को पूरी तरह से बदल देना है. आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट में कितनी लगेगी लागत.

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क्यों शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट? 

यह टनल नदी के उत्तरी किनारे पर गोहपुर को दक्षिणी किनारे पर नुमालीगढ़ से जोड़ेगी. 33.7 किलोमीटर तक फैले इस प्रोजेक्ट में 15.79 किलोमीटर का एक काफी बड़ा पानी के अंदर का हिस्सा शामिल है. यह इसे भारत के सबसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में से एक बनाता है. एक बार पूरा हो जाने पर दोनों सिरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है. यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाएगा. 

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प्रोजेक्ट की कुल लागत 

प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹18,662 करोड़ है. अगर इसे विस्तार से देखें तो इसका मतलब यह है कि इस सुरंग के 1 किलोमीटर के निर्माण की लागत लगभग ₹550 करोड़ से ₹600 करोड़ है. यह आम सड़क निर्माण की तुलना में काफी ज्यादा है. जमीन के नीचे और पानी के अंदर बनने वाली सुरंग आम हाईवे या फिर एलिवेटेड सड़कों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा महंगी होती हैं. 

यह इतना महंगा क्यों है?

ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल नदी के नीचे निर्माण करना कोई छोटा काम नहीं है. यह सुरंग नदी के तल से 32 से 57 मीटर नीचे आधुनिक टनल  बोरिंग मशीन तकनीक का इस्तेमाल करके बनाई जाएगी. इसके अलावा वॉटरप्रूफिंग, दबाव झेलने की क्षमता और संरचनात्मक मजबूती की जरूरत भी होती है. इसके ऊपर हर 500 मीटर पर आपातकालीन निकास मार्ग जैसी सुरक्षा सुविधा निवेश को और भी ज्यादा बढ़ा देती हैं. 

सिलीगुड़ी गलियारा एक संकरा रास्ता है और यह मुख्य भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ता है. यहां कनेक्टिविटी को मजबूत करना न सिर्फ आम लोगों के सफर के लिए बल्कि रक्षा से जुड़े लॉजिस्टिक्स के लिए भी काफी जरूरी है. यह एक टि्वन ट्यूब टनल होगी. इसका मतलब है कि दो अलग-अलग सुरंगे एक दूसरे के समानांतर चलेंगी. हर सुरंग में दो लेन की सड़क होगी और एक में रेल की पटरियां भी होंगी. इस प्रोजेक्ट के लिए फंड सड़क परिवहन और  राजमार्ग मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच मोटे तौर पर 80:20 के अनुपात में बांटा जाएगा.

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