मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग का असर वैश्विक स्तर पर व्यापक रूप से पड़ा है. वहीं, दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से ज्यादा वक्त से संघर्ष और तनाव की स्थिति जारी है. इस युद्ध ने भी दुनिया के कई देशों में अपना प्रभाव दिखाया है. इन युद्धों में यूक्रेन और इजरायल को अमेरिका के शक्तिशाली हथियारों का साथ मिला, जिसकी वजह से वो ईरान और रूस जैसे दुश्मनों के सामने लंबे समय से टिके हुए है, लेकिन अगर मध्य पूर्व के जैसे युद्ध के हालात भारत में हो जाएं, तो इसके लिए देश कितना तैयार है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की संपूर्ण सुरक्षा के लिए एक कवच सुदर्शन चक्र के निर्माण की बात कही. अगर भारत ऐसी किसी परिस्थिति में फंसता हो तो भारत का सुरक्षा तकनीक कितनी तैयार है. इस संबंध में बातचीत करते हुए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO के चीफ समीर वी. कामत ने कहा कि भारत के सुदर्शन चक्र को पूरी तरह से तैयार होने में करीब 10 साल का समय लगेगा, लेकिन इसे कई फेज के तहत अगले कुछ सालों में ही शुरू किया जाएगा.

सुदर्शन चक्र को लेकर क्या बोले DRDO चीफ?

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रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख समीर वी. कामत ने न्यूज एजेंसी एएनआई से नेशनल सिक्योरिटी समिट में बातचीत करते हुए भारत के मिशन सुदर्शन चक्र के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा, ‘हमने मिशन सुदर्शन चक्र को लेकर एक फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा जाएगा और इसी रिपोर्ट के आधार पर ऑपरेशन सुदर्शन चक्र के लिए एक प्रोग्राम शुरू किया जाएगा.’

उन्होंने कहा, ‘जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस पूरे प्रोग्राम को तैयार करने में करीब 10 साल का समय लगेगा, लेकिन इसकी तैनाती कई फेजों में की जाएगी.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमारे मौजूदा डिफेंस सिस्टम्स के आधार पर हम अगले 2–3 सालों में इसका पहला फेज तैयार करेंगे. दूसरा फेज में हमारे पास जो तकनीक है, उसे बड़े स्तर पर बढ़ाने का काम किया जाएगा और तीसरे फेज में कई नई तकनीकों को शामिल किया जाएगा, जिससे पूरे देश को पूर्ण सुरक्षा कवरेज दिया जा सके.’

लंबे समय के युद्ध की चुनौती पर बोले DRDO चीफ

डीआरडीओ चीफ समीर वी. कामत ने कहा, ‘लंबे समय के युद्ध की चुनौती पर बात करें, तो जैसा कि वाइस एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि यह आपके सप्लाई चेन की मजबूती और उत्पादन करने की क्षमता पर निर्भर करती है और यह क्षमता हमें देश के भीतर ही विकसित करनी होगी.’

उन्होंने कहा, ‘हम अपने उत्पादन को कभी बड़े स्तर पर नहीं बढ़ा पाए, क्योंकि हमारी खरीद प्रक्रिया भी काफी धीमी है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों और लंबे युद्ध की संभावना को देखते हुए हमें इस पर ध्यान देना होगा कि ऐसी क्षमता कैसे विकसित की जाए और सप्लाई चेन को कैसे मजबूत बनाया जाए.’

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