Dry Fruit Shortage: होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य तनाव और शिपिंग में रूकावटों का असर अब भारत के सूखे मेवों के बाजार पर भी बुरी तरह से पड़ने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच नाकाबंदी और समुद्री अस्थिरता की वजह से खाड़ी के मुख्य बंदरगाहों से कंटेनरों की आवाजाही काफी ज्यादा धीमी हो चुकी है. इस वजह से भारत में इंपोर्ट होने वाले सूखे मेवों की आपूर्ति में भारी संकट पैदा हो गया है. 

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इंपोर्ट पर काफी ज्यादा निर्भरता 

भारत अपनी सूखे मेवों की जरूरत का लगभग 80% हिस्सा विदेशों से इंपोर्ट करता है. इस वजह से घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में होने वाली रूकावटों के प्रति काफी ज्यादा संवेदनशील हैं. देश के सूखे मेवों के उद्योग का मौजूदा मूल्य लगभग 8.5 अरब डॉलर है.  इसमें आपूर्ति ईरान, अफगानिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और मध्य एशियाई देशों से होती है. क्योंकि इनमें से कई शिपमेंट होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी के शिपिंग गलियारों से होकर गुजरते हैं इस वजह से समुद्र यातायात में थोड़ी सी भी रुकावट का असर तुरंत भारत के थोक और खुदरा बाजारों पर पड़ता है. 

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पिस्ता की कीमतों में उछाल

जिन उत्पादों पर सबसे बड़ा असर पड़ा है उनमें पिस्ता शामिल है. ईरानी और पेशावरी किस्मों पर काफी ज्यादा फर्क पड़ा है. काफी कम समय में ही कीमतों में लगभग ₹750 से ₹800 प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है. ईरानी पिस्ता पहले लगभग ₹1650 प्रति किलोग्राम की दर पर मिलता था. लेकिन अब कई खुदरा बाजारों में कथित तौर पर ₹2400 से ₹3400 प्रति किलोग्राम के बीच बिक रहा है. 

अंजीर, खजूर और खुबानी भी महंगे 

इस संकट का अंजीर के इंपोर्ट पर भी काफी असर पड़ा है. क्योंकि भारत में अंजीर की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा ईरान से आता है इस वजह से इसके खुदरा कीमतों में सीधे तौर पर लगभग 30 से 40% की बढ़ोतरी देखने को मिली है.  ठीक इसी तरह खजूर में भी कीमतों में इजाफा हुआ है. कुछ किस्मत कथित तौर पर ₹210 से बढ़कर लगभग ₹350 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं. इसी के साथ ईरानी खुबानी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. दिसंबर से कई बाजारों में कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं .  कीमत ₹750 प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग ₹1400 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है.

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मामरा बादाम लगातार महंगे होते जा रहे 

आपूर्ति में कमी का असर मामरा बादामों पर भी पड़ा है.  ऐसा कहा जा रहा है कि स्टॉक कम होने और नई खेप आने में देरी की वजह से कीमतों में लगभग ₹300 से ₹500 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है.

थोक बाजार में स्टॉक खत्म 

इंपोर्ट में कमी की वजह से भारत के सबसे बड़े सूखे मेवों के थोक केंद्रों पर भी भारी दबाव पड़ रहा है. पश्चिम एशिया में संकट के पिछले दो महीनों में ईरान से सूखे मेवों का इंपोर्ट 30% से भी कम हो गया है.

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