भारत और पाकिस्तान की सीमा हमेशा से बेहद संवेदनशील रही है. इस बॉर्डर पर घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए भारतीय सुरक्षा बल आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. सीमा पर लगी पारंपरिक कटीली तारों की जगह अब एक बेहद हाई-टेक और खतरनाक इलेक्ट्रिक फेंसिंग सिस्टम काम कर रहा है, जिसे छूते ही दुश्मन के होश उड़ जाते हैं. आम लोगों के मन में हमेशा यह सवाल रहता है कि आखिर इन बाड़ों में कितना करंट दौड़ता है और इसे छूने पर किसी घुसपैठिए का क्या हाल होता है. आइए आज इसका जवाब जानें.

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सीमा सुरक्षा का आधुनिक कवच

भारत-पाकिस्तान की कुल 3,323 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 'कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम' यानी CIBMS लागू किया गया है. इसके तहत पुरानी और साधारण कटीली बाड़ को हटाकर स्मार्ट और इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई जा रही है. सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा अपनाई गई यह नई प्रणाली मैदानी और बेहद संवेदनशील इलाकों में घुसपैठियों के लिए एक अभेद्य दीवार की तरह काम करती है. यह सिस्टम हर मौसम में सीमा की चाक-चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

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कोबरा फेंसिंग का घातक वोल्टेज

बॉर्डर पर घुसपैठ रोकने के लिए सबसे आधुनिक कोबरा फेंसिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस सुरक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसका पावर सिस्टम है. इस फेंसिंग के तारों में करीब 7,000 से लेकर 10,000 वोल्ट तक का भारी-भरकम करंट दौड़ता है. इतनी बड़ी मात्रा में वोल्टेज होने के कारण कोई भी दुश्मन या घुसपैठिया इन तारों के करीब आने या इन्हें पार करने की हिम्मत नहीं कर पाता है. यह वोल्टेज किसी भी इंसान को पल भर में दूर झटकने करने की ताकत रखता है.

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जानलेवा नहीं पर बेहद असरदार तकनीक

आमतौर पर लोगों को लगता है कि 10,000 वोल्ट का करंट किसी की भी जान ले सकता है, लेकिन यहां विज्ञान का एक अलग नियम काम करता है. इस बाड़ में 'हाई-वोल्टेज और लो-करंट' का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल होता है. इसका मतलब यह है कि वोल्टेज तो बहुत ज्यादा होता है, लेकिन करंट की ताकत यानी एम्पियर बेहद कम (मिली-एम्पियर में) रखी जाती है. इससे तारों को छूने वाले इंसान की तुरंत मौत नहीं होती, बल्कि उसे एक ऐसा तगड़ा झटका लगता है जो उसे हिलाकर रख देता है.

पल्स तकनीक से नाकाम होगी हर चाल

इस पूरे इलेक्ट्रिक फेंसिंग सिस्टम को खास 'पल्स तकनीक' पर ऑपरेट किया जाता है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगर कोई दुश्मन धोखे से भी इन तारों को छू लेता है, तो वह करंट की वजह से तारों से चिपकता नहीं है. पल्स तकनीक के झटके के कारण छूने वाला इंसान तुरंत दूर जाकर गिरता है. करंट का यह तेज झटका घुसपैठिए को कुछ समय के लिए पूरी तरह सुन्न और अचेत (बेहोश) कर देता है, जिससे वह भाग नहीं पाता.

कमांड सेंटर में तुरंत बजता है अलार्म

स्मार्ट फेंसिंग सिर्फ करंट मारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बेहद चौकस सुरक्षा तंत्र है. अगर कोई घुसपैठिया इन हाई-टेक तारों को काटने, तोड़ने या फिर सिर्फ छूने की कोशिश भी करता है, तो कटीली तारों में लगे आधुनिक सेंसर एक्टिव हो जाते हैं. इसके तुरंत बाद सुरक्षा बलों के मुख्य कंट्रोल रूम में एक लाउड अलार्म बज जाता है. इससे वहां तैनात जवानों को सटीक लोकेशन का पता चल जाता है और वे तुरंत एक्शन ले लेते हैं.

दुर्गम इलाकों के लिए लेजर वॉल

बॉर्डर के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां नदियां, दलदल, गहरे नाले या पहाड़ी दर्रे होने के कारण पक्की कटीली बाड़ लगाना मुमकिन नहीं है. ऐसे कठिन रास्तों पर सुरक्षा के लिए अदृश्य लेजर वॉल बनाई गई हैं. इन इलाकों से जैसे ही कोई दुश्मन गुजरने की कोशिश करता है और लेज़र किरणें कटती हैं, वैसे ही सीमा पर तैनात सैनिकों को तुरंत अलर्ट मिल जाता है. इसके साथ ही रात में निगरानी के लिए थर्मल कैमरे और ड्रोन का इस्तेमाल होता है.

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