Dog Driving Licence: 2012 में न्यूजीलैंड ने एक असामान्य पहल के लिए ध्यान आकर्षित किया था. दरअसल यहां कुत्तों को गाड़ी चलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया था. पोर्टर नाम के कुत्ते ने सफलतापूर्वक वाहन चलाया और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वाला दुनिया का पहला कुत्ता बन गया. यह उपलब्धि सिर्फ एक स्टंट नहीं थी जिसमें गाड़ी चला रहे एक जानवर को शामिल किया गया था. यह एक अभियान का हिस्सा था जिसका उद्देश्य बचाए गए कुत्तों के बारे में धारणाओं को चुनौती देना और लोगों को आश्रयों में रहने वाले या फिर सड़कों से बचाए गए जानवरों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था. 

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इस परियोजना की शुरुआत सोसायटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स द्वारा की गई थी. यह न्यूजीलैंड में स्थित एक चैरिटी है. इसका केंद्रीय संदेश यह था कि बचाए गए कुत्तों को कम नहीं आंका जाना चाहिए. 

कुत्तों को गाड़ी चलाने का प्रशिक्षण क्यों दिया गया? 

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परियोजना का एक खास पशु कल्याण उद्देश्य था. यह उद्देश्य था गोद लेने को बढ़ावा देना. सड़कों से बचाए गए या फिर शेल्टर में रहने वाले कुत्तों को संभावित मालिकों द्वारा नजरअंदाज किया जा सकता है और अभियान का उद्देश्य जनता के उन्हें देखने के तरीके को बदलना है. यह चैरिटी चाहती थी कि लोग इस बात को पहचाने कि उचित प्रशिक्षण दिए जाने पर यह जानवर सीख सकते हैं, निर्देशों का जवाब दे सकते हैं और चुनौती पूर्ण कार्यों में महारत भी हासिल कर सकते हैं. 

सिर्फ कुत्ते की बुद्धिमत्ता के दावों पर भरोसा करने के बजाय परियोजना ने एक सार्वजनिक उदाहरण का इस्तेमाल किया. कुत्तों को एक वाहन को कंट्रोल करते हुए देख कर ध्यान आकर्षित करने और लोगों को शेल्टर में रहने वाले जानवरों की क्षमताओं पर दोबारा से विचार करने के लिए प्रोत्साहित करने का एक असामान्य तरीका पेश किया गया. इसका लक्ष्य समाज को बचाए गए कुत्तों को कम आंकने से रोकने के लिए राजी करना था और उन्हें गोद लेने का मौका देना था. 

एक मॉडिफाइड मिनी कूपर

प्रशिक्षण के लिए कुत्तों के इस्तेमाल के लिए अनुकूलित वाहन की जरूरत थी. एक मिनी कूपर को खास तौर से ‌मॉडिफाइड किया गया ताकि कुत्ते इसके कंट्रोल को अपने पंजे से संचालित कर सकें. गियर, एक्सीलेटर और ब्रेक कुछ जानवरों के लिए ड्राइव को और ज्यादा आसान बनाने के लिए जरूरी काम को बनाए रखने के लिए कॉन्फिगर किया गया था.

कुत्तों को सिर्फ एक साधारण गाड़ी में नहीं रखा गया था. इसके बजाय वहां को प्रशिक्षण के लिए एडजस्ट किया गया था जिससे जानवरों को उनके अनुकूल तरीके से ड्राइविंग मेकैनिज्म को समझने में मदद मिले. 

8 हफ्तों की ट्रेनिंग 

कुत्तों ने 8 हफ्ते की कड़ी ट्रेनिंग पूरी की. रिपोर्ट के मुताबिक उस समय के बाद उन्होंने रेस ट्रैक पर अपने आप गाड़ी चलाई . उनके प्रदर्शन ने ध्यान आकर्षित किया क्योंकि यह दर्शाता था कि कुत्ते निर्देश और अभ्यास के जरिए से कितना सीख सकते हैं.

पोर्टर की कहानी ने कुत्ते की पहचान दुनिया में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वाले पहले जानवर के रूप में की. यह मानव मोटर चालक के लिए सामान्य ड्राइविंग की योग्यता के बजाय न्यूजीलैंड की 2012 परियोजना के हिस्से के रूप में मील का पत्थर साबित हुआ. वाहन को खास तौर से अभ्यास के लिए मोडिफाइड किया गया था और प्रशिक्षण कुत्तों की क्षमताओं के मुताबिक डिजाइन किया गया था. 

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पशु कल्याण संदेश का एक असामान्य रास्ता 

न्यूजीलैंड की पहल कुत्ते प्रशिक्षण, एक खास तौर से मॉडिफाइड मिनी कूपर और एक गोद लेने के अभियान को एक साथ लेकर आई. इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि बचाए गए और शेल्टर वाले कुत्ते बुद्धिमान, आज्ञाकारी और मुश्किल काम को सिखाने में सक्षम हो सकते हैं. 8 हफ्ते के कार्यक्रम और रेस ट्रैक के प्रदर्शन ने उच्च संदेश को यादगार बनाने में मदद की. 

कुत्तों को एक अलग चुनौती देकर चैरिटी ने सार्वजनिक धारणाओं को बदलने और गोद लेने को प्रोत्साहित करने की मांग की. परियोजना का महत्व न सिर्फ एक कुत्ते द्वारा गाड़ी चलाने के बारे में था बल्कि उस उपलब्धि का इस्तेमाल घरों की प्रतीक्षा कर रहे जानवरों पर ध्यान आकर्षित करने में भी था.

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