Import Duty Increased On Gold: भारत सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सोने-चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी में 150 फीसदी का भारी-भरकम इजाफा कर दिया है. रातों-रात लिए गए इस फैसले ने न केवल सर्राफा बाजार में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील को भी नए संदर्भ दे दिए हैं. इस कदम का सीधा असर अब आम आदमी की जेब और देश में होने वाली सोने की तस्करी की संभावनाओं पर पड़ता दिख रहा है.

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इंपोर्ट ड्यूटी में ऐतिहासिक उछाल

केंद्र सरकार ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर लगने वाली प्रभावी आयात शुल्क की दरों को 6 फीसदी से सीधा बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है. तकनीकी तौर पर देखें तो इसमें 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एआईडीसी (AIDC) शामिल है. यह बढ़ोतरी प्रतिशत के लिहाज से 150 फीसदी की वृद्धि दर्शाती है. सरकार का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और रुपये की गिरती वैल्यू को संभालना है. जब आयात महंगा होता है, तो देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा में कमी आती है, जिससे चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहता है.

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क्या अब स्मगलिंग के धंधे में आएगी तेजी?

इतनी भारी ड्यूटी बढ़ने के बाद बाजार के जानकारों और बुलियन डीलरों ने एक गंभीर चेतावनी दी है. उनका मानना है कि जब कानूनी तौर पर सोना लाना बहुत महंगा हो जाता है, तो अवैध रास्ते यानी कालाबाजारी का रास्ता सुगम हो जाता है. 15 फीसदी की ड्यूटी का मतलब है कि वैध और अवैध सोने की कीमत में एक बड़ा अंतर पैदा होगा. यह अंतर तस्करों के लिए भारी मुनाफे का लालच बनेगा, जिससे पड़ोसी देशों की सीमाओं के जरिए भारत में अवैध सोने की आवक बढ़ने की प्रबल आशंका है.

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पुराने अनुभवों से कड़वा सबक

इतिहास गवाह है कि जब-जब सोने पर टैक्स या ड्यूटी बढ़ाई गई है, तब-तब तस्करी के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2024 के आंकड़ों पर गौर करें तो उस वक्त ड्यूटी कम की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले थे और तस्करी के मामलों में गिरावट आई थी. लेकिन अब फिर से पुरानी स्थिति लौटने का डर है. जानकारों का कहना है कि ऊंचे टैक्स के कारण लोग चोरी-छिपे सोना लाने वाले नेटवर्क पर निर्भर होने लगते हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान तो होता ही है, साथ ही बाजार की पारदर्शिता भी खत्म हो जाती है.

घरेलू कीमतों पर सीधा प्रहार

इस फैसले का सबसे बड़ा झटका उन ग्राहकों को लगेगा जो शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना खरीदना चाहते हैं. इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ते ही भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय मार्केट की कीमतों से काफी ऊपर निकल जाएंगी. इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारतीय ग्राहकों को प्रति 10 ग्राम सोने के लिए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा कीमत चुकानी होगी. प्रधानमंत्री की अपील और इस नई ड्यूटी के बीच, मध्यम वर्ग के लिए अब सोना खरीदना एक बड़ी चुनौती बन गया है.

जांच एजेंसियों के लिए नई अग्निपरीक्षा

ड्यूटी में इस इजाफे के बाद डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) और सीमा शुल्क विभाग की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है. हवाई अड्डों से लेकर समुद्री रास्तों और थल सीमाओं तक, अवैध सोने की घुसपैठ को रोकना अब एक प्रशासनिक सिरदर्द होगा. जानकारों का मानना है कि तस्कर नए-नए तरीकों से सोने को देश के भीतर लाने की कोशिश करेंगे, जिसे ट्रैक करना और पकड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा.

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