दुनिया में जब भी महाविनाशकारी हथियारों की बात होती है, तो परमाणु बम का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों की तबाही को दुनिया आज तक नहीं भूली है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आधुनिक सैन्य विज्ञान में परमाणु बम से भी कई गुना ज्यादा खतरनाक और शक्तिशाली हथियार मौजूद है, जिसे हाइड्रोजन बम या एच-बम कहा जाता है.

Continues below advertisement

अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनके काम करने के तरीके और विनाश करने की क्षमता में जमीन-आसमान का अंतर है. आइए जानते हैं कि ये दोनों बम एक-दूसरे से कितने अलग हैं और इनसे कितनी बड़ी तबाही मच सकती है.

किस प्रोसेस पर काम करता है परमाणु बम?

परमाणु बम, जिसे फिशन बम भी कहा जाता है, यह न्यूक्लियर फिशन यानी विखंडन की प्रक्रिया पर आधारित होता है. इसमें यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसे भारी परमाणुओं के नाभिक को तोड़ा जाता है, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है और एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है. हिरोशिमा पर गिराए गए लिटिल बॉय बम की क्षमता करीब 15 किलोटन थी, जबकि नागासाकी पर गिराए गए फैट मैन बम की क्षमता करीब 21 किलोटन आंकी गई थी.

Continues below advertisement

हाइड्रोजन बम में कैसे होता है धमाका?

हाइड्रोजन बम, जिसे थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहा जाता है, न्यूक्लियर फ्यूजन यानी संलयन की प्रक्रिया पर काम करता है. इसमें हाइड्रोजन के दो आइसोटोप, ड्यूटीरियम और ट्रिटियम को आपस में जोड़ा जाता है, जिससे सूरज के अंदर होने वाली प्रक्रिया जैसी भारी ऊर्जा निकलती है. इसकी खास बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए पहले एक छोटा फिशन विस्फोट किया जाता है, जो इतना तापमान और दबाव पैदा करता है कि फ्यूजन रिएक्शन शुरू हो जाए, इसीलिए इसे टू-स्टेज हथियार कहा जाता है.

तबाही में कितना है फर्क?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक हाइड्रोजन बम परमाणु बम के मुकाबले सैकड़ों से लेकर हजार गुना तक ज्यादा शक्तिशाली होता है. जहां परमाणु बम की क्षमता किलोटन यानी हजारों टन टीएनटी के बराबर मापी जाती है, वहीं हाइड्रोजन बम की क्षमता मेगाटन यानी लाखों टन टीएनटी के बराबर होती है. जहां एक परमाणु बम किसी शहर के एक बड़े हिस्से को तबाह कर सकता है, वहीं हाइड्रोजन बम पूरे महानगर को खत्म करने के साथ-साथ सैकड़ों किलोमीटर दूर तक भी नुकसान पहुंचा सकता है.

यह भी पढ़ें: सैटेलाइट जमीन पर क्यों नहीं गिरती, हवा में कैसे टंगी रहती है?

अब तक का सबसे शक्तिशाली परीक्षण

अब तक बनाए गए सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन बम का उदाहरण है सोवियत संघ का जार बोम्बा, जिसका परीक्षण 1961 में किया गया था और जिसकी क्षमता करीब 50 मेगाटन आंकी गई थी. इसके मुकाबले हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम इसके सामने बेहद छोटा नजर आता है. हैरानी की बात यह है कि हाइड्रोजन बम को अब तक कभी भी असली युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया गया है, इसे सिर्फ परीक्षणों के दौरान ही टेस्ट किया गया है.

यह भी पढ़ें: पैर में बिछिया क्यों पहनती हैं भारतीय महिलाएं, क्या इसके पीछे कोई साइंस?