आसमान में हजारों सैटेलाइट लगातार चक्कर लगाते रहते हैं और यह देखकर अक्सर मन में सवाल आता है कि आखिर इतना भारी भरकम सैटेलाइट बिना किसी सहारे के आसमान में कैसे टंगा रहता है और जमीन पर क्यों नहीं गिरता? हकीकत यह है कि सैटेलाइट हवा में टंगा नहीं रहता, बल्कि वह लगातार धरती की तरफ गिरता ही रहता है, बस वह गिरने के साथ-साथ इतनी तेजी से आगे भी बढ़ता है कि कभी जमीन तक पहुंच ही नहीं पाता. यह पूरा खेल गुरूत्वाकर्षण और स्पीड के बीच बेहतरीन संतुलन का है. 

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गुरुत्वाकर्षण और स्पीड का संतुलन

सैटेलाइट के न गिरने के पीछे का सबसे बड़ा कारण है गुरूत्वाकर्षण बल और सैटेलाइट के बीच की रफ्तार का संतुलन. जब किसी सैटेलाइट को रॉकेट के जरिए अंतरीक्ष में छोड़ा जाता है तो वैज्ञानिक उसे एक निश्चित ऊंचाई पर ले जाकर एक खास रफ्तार पर उसे आगे की तरफ धकेल देते हैं. 

इसे समझने का सबसे आसान तरीका है एक पहाड़ी की चोटी से गेंद को फेंकना. अगर गेंद को हल्के हाथ से फेंका जाए तो वह थोड़ी दूर जाकर जमीन पर गिर जाएगी. अगर उसे और तेजी से फेंका जाए तो वह और आगे जाकर गिरेगी. लेकिन अगर गेंद को इतनी जबरदस्त रफ्तार से फेंका जाए कि जितनी तेजी से वह नीचे गिरती है, उतनी ही तेजी से धरती की गोलाई भी उसके नीचे से मुड़ती चली जाए, तो वह गेंद कभी जमीन पर गिरेगी ही नहीं, बल्कि धरती के चारों तरफ लगातार चक्कर काटती रहेगी. 

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सैटेलाइट के साथ भी बिल्कुल यही होता है. सैटेलाइट लगातार पृथ्वी की तरफ नीचे गिर रही होती है, लेकिन उसकी आगे बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज होती है कि वह कभी पृथ्वी की सतह को छू नहीं पाती और गोल घूमती रहती है.

सेंट्रीफ्यूगल फोर्स का कमाल

सैटेलाइट को हवा में टिकाए रखने के लिए एक और नियम बड़ा काम आता है, जिसे सेंट्रीफ्यूगल फोर्स कहते हैं. जब कोई चीज गोल-गोल घूमती है तो उस पर बाहर की तरफ भागने का बल लगता है. जैसे कि जब आप एक धागे में पत्थर बांधकर उसे तेजी से गोल-गोल घुमाते हैं तो वह पत्थर बाहर की तरफ खिंचा रहता है. 

ठीक इसी तरह, जब सैटेलाइट पृथ्वी के चक्कर काटती है तो गोल घूमने के कारण उस पर बाहर की तरफ एक बल लगता है. वहीं दूसरी तरफ, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उसे अंदर की तरफ खींचता है. ये दोनों बल आपस में बिल्कुल बराबर हो जाते हैं, जिससे सैटेलाइट न तो अंतरिक्ष में दूर भाग पाती है और न ही जमीन पर गिरती है.

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हवा की कमी भी बनाती है मदद

धरती की सतह के पास हवा का घर्षण किसी भी तेज रफ्तार चीज को धीमा कर देता है, लेकिन सैटेलाइट जिस ऊंचाई पर होते हैं, वहां वायुमंडल न के बराबर होता है. इसी वजह से सैटेलाइट को अपनी रफ्तार बनाए रखने के लिए किसी इंजन या ईंधन की जरूरत नहीं पड़ती और वह बिना रुके लगातार धरती के चक्कर लगाता रहता है. यही वजह है कि एक बार सही ऊंचाई और सही रफ्तार पर पहुंचने के बाद सैटेलाइट कई साल बिना किसी बाहरी मदद के अपनी कक्षा में घूमता रहता है. 

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