Strait of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक है. फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने वाले इस संकरे समुद्री रास्ते से दुनिया भर में कच्चे तेल और लिक्वेफाइड नेचुरल गैस के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर इस रास्ते पर काफी ज्यादा पड़ा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता अचानक से खुल जाए तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर कैसा पड़ेगा. 

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क्यों है यह रास्ता इतना जरूरी?

होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक देश के लिए एक अहम ट्रांजिट रूट का काम करता है. दुनिया के कच्चे तेल के शिपमेंट का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. शिपिंग में किसी भी तरह की रुकावट का असर तुरंत वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है. जबकि इस इलाके में स्थिरता से दुनिया भर में आर्थिक विकास और बाजार के भरोसे को बढ़ावा मिलता है. 

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वैश्विक बाजारों पर असर 

होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह खोलने और सुरक्षित होने से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आएगी. सप्लाई में रुकावट का खतरा खत्म हो जाने से तेल बाजारों में भरोसा बढ़ेगा और रिस्क प्रीमियम कम होगा. सस्ता कच्चा तेल दुनिया भर के देशों और व्यवसायों के लिए ऊर्जा की लागत को कम करेगा.

वैश्विक सप्लाई चेन में सुधार 

तनाव कम होने से खाड़ी देशों से तेल और गैस का निर्यात बिना किसी रूकावट के हो सकेगा. इससे वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिर करने और ऊर्जा शिपमेंट में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी. ईंधन और परिवहन पर निर्भर उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक्स और बेहतर ऑपरेशनल क्षमता का फायदा मिलेगा. 

शिपिंग और बीमा लागत में कमी 

भू राजनीतिक अनिश्चितता के समय में शिपिंग कंपनियों को अक्सर ज्यादा बीमा प्रीमियम और ऑपरेशनल खर्च का सामना करना पड़ता है. स्थिरता लौटने से यह लागत कम होगी. इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए माल ढुलाई का खर्च घटेगा और व्यवसायों को इंपोर्ट एक्सपोर्ट पर पैसे बचाने में मदद मिलेगी. 

वैश्विक शेयर बाजारों को बढ़ावा 

वित्तिय बाजार आमतौर पर ऊर्जा की कम कीमतों और कम भू राजनीतिक जोखिमों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं. निवेशक स्थिर होर्मुज को आर्थिक निश्चितता के संकेत के रूप में देखेंगे. इससे दुनिया भर के प्रमुख शेयर बाजारों में तेजी आ सकती है. 

भारत को कैसे होगा फायदा? 

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% इंपोर्ट करता है. इसमें से एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से होर्मुज के रास्ते से ही आता है. अगर ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें कम होती हैं तो भारत का इंपोर्ट बिल काफी कम हो जाएगा. इससे सरकार के फाइनेंस पर दबाव कम होगा और कीमती विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी.

इसी के साथ ईंधन की कीमतें देश भर में सामान लाने ले जाने की लागत पर असर डालती हैं. कच्चे तेल की कीमतें कम होने से पेट्रोल और डीजल सस्ते हो सकते हैं. इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम होगा. इसी के साथ सब्ज, फल, खाने पीने की चीज और दूसरी जरूरी चीजों की कीमत भी स्थिर हो सकती हैं या फिर कम हो सकती हैं.

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