Ice Cream History: आइसक्रीम भले ही आज के जमाने की चीज लगती हो लेकिन इसकी कहानी हजारों साल पुरानी है. इसका श्रेय किसी एक इंसान को नहीं दिया जाता बल्कि यह धीरे-धीरे विकसित हुई है. इसमें अलग-अलग संस्कृतियों ने अपना-अपना अंदाज जोड़ा है. 

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आइसक्रीम की प्राचीन जड़ें 

इतिहासकार आइसक्रीम के सबसे शुरुआती रूप का पता प्राचीन चीन में लगभग 3000 ऐसा पूर्व तक लगाते हैं. वहां के लोग दूध और चावल को मिलाकर प्राकृतिक बर्फ की मदद से जमाते थे. यह आज की आइसक्रीम की तरह मलाईदार तो नहीं थी लेकिन इसने फ्रोजन डेजर्ट की नींव जरूर रखी.

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कुछ सदियों बाद लगभग 500 ईसा पूर्व में ईरान में लोगों ने इसका एक और बेहतर रूप तैयार किया.  वे बर्फ को याखचाल नाम की खास जगह में जमा करके रखते थे. वे उसे अंगूर के रस, केसर और गुलाब जल के साथ मिलाकर एक ऐसी चीज बनाते थे जो आज के फालूदा से काफी मिलती-जुलती थी.

यूरोप तक कैसे पहुंची आइसक्रीम?

मशहूर यात्री मार्को पोलो को अक्सर 13वीं सदी में चीन से इटली तक आइसक्रीम बनाने की शुरुआती विधि लाने का श्रेय दिया जाता है.  वहां से यह विचार पूरे यूरोप में फैला और धीरे-धीरे विकसित होकर आज के डेजर्ट के रूप में तैयार हो गया. 1843 में एक बड़ा मोड़ तब आया जब नैन्सी जॉनसन ने हाथ से चलने वाली आइसक्रीम मशीन का आविष्कार किया और उसे पेटेंट करवाया.

भारत का पहला फ्रोजन डेजर्ट 

आधुनिक आइसक्रीम ब्रांडों के आने से काफी पहले ही भारत के पास अपना खुद का एक फ्रोजन डेजर्ट मौजूद था-कुल्फी. यह डेजर्ट 16वीं सदी में मुगल काल के दौरान काफी लोकप्रिय हुआ. सम्राट अकबर के शासनकाल में हिंदू कुश पहाड़ों से बर्फ मंगवाई जाती थी और इसका इस्तेमाल सूखे मेवों और मसाले से बने गाढ़े दूध को जमाने के लिए किया जाता था. 

भारत में आधुनिक आइसक्रीम 

भारत में आधुनिक आइसक्रीम काफी बाद में 1940 के दशक में आई. सतीश सोना ने क्वालिटी ब्रांड की शुरुआत की. यह देश में व्यावसायिक तौर पर बनाए जाने वाली आइसक्रीम की शुरुआत थी. क्वालिटी ने वनीला और स्ट्रॉबेरी जैसे पश्चिमी फ्लेवर पेश किए और ये जल्द ही मशहूर हो गए.

बाद के सालों में रघुनाथन कामथ ने असली फलों के फ्लेवर पर ध्यान केंद्रित करके इस उद्योग में क्रांति ला दी. उनका ब्रांड नेचुरल आइसक्रीम आर्टिफिशियल फ्लेवर के बजाय ताजी सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए मशहूर हो गया.

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