पाकिस्तान की सरकार के लिए बलूचिस्तान नासूर बनता जा रहा है. बलूच लड़ाके आए दिन पाकिस्तान सेना को निशाना बनाकर हमले कर रहे हैं, जिससे यह इलाका धीरे-धीरे सेना के हाथ से निकल रहा है. बलूचिस्तान के अधिकांश इलाकों में बलूच लिबरेशन आर्मी ने अपना कब्जा जमा लिया है और यहां पाकिस्तान सरकार की पकड़ कमजोर हो रही है. 11 जुलाई को ही यहां झोब के सुर-दकाई इलाके में उग्रवादियों ने लाहौर जा रही बस पर हमला किया, जिसमें नौ यात्रियों की मौत हो गई. 

बलूचिस्तान में इससे पहले उग्रवादियों ने ऐसे कई हमले किए हैं, जिसमें पाकिस्तानी सेना के सेना के जवानों को मौत के घाट उतार दिया गया. ऐसे में यात्रियों को निशाना बनाए जाने का मामला काफी अलग और चौंकाने वाला है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान अपने किन जवानों की तैनाती करता है और कैसे इस इलाके में उसकी पकड़ कमजोर पड़ रही है. 

सबसे गरीब, लेकिन संसाधनों से भरपूर इलाका

ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा का केंद्र रहा है. यह इलाका गैस, खनिज व अन्य प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है. इसके बावजूद बलूचिस्तान पाकिस्तान के उन इलाकों में शुमार है, जो सबसे गरीब हैं. बलूचिस्तान की जनता पाकिस्तान सरकार से इसी बात से नाराज है और आजादी चाहती है. बलूच लिबरेशन आर्मी लंबे समय से पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी के लिए जंग लड़ रही है. बीते दिनों BLA ने बलूचिस्तान को आजाद मुल्क भी घोषित कर दिया था. 

यहां कौन से सैनिकों की होती है तैनाती

लंबे समय से हिंसा का केंद्र बना बलूचिस्तान पाकिस्तान सरकार के लिए काफी संवेदनशील इलाका है. यहां पाकिस्तानी सरकार को कई तरह की सैन्य और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. बलूच आर्मी को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने यहां पाकिस्तान फ्रंटियर कॉर्प्स को तैनात किया है, जो पाकिस्तान के चार अर्धसैनिक बलों का समूह है. इसके अलावा इस इलाके में पाकिस्तानी सेना के जवानों भी बड़ी मात्रा में तैनाती की गई है. 

कैसे हाथ से निकल रहा इलाका

बीते कुछ सालों में बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है. बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के काफिलों को निशाना बना रहे हैं और हथियार छीन रहे हैं, जिससे धीरे-धीरे उनकी मौजूदगी बढ़ती जा रही है और पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर पड़ रही है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बलूचिस्तान के अधिकांश इलाकों में बलूच लड़ाकों ने अपना कब्जा जमा लिया है और आने वाले दिनों में यह इलाका पूरी तरह पाकिस्तान के हाथ से निकल सकता है. 

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