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नेपाल में कैसे काम करती है संसदीय व्यवस्था, PM बनने के बाद कितने ताकतवर होंगे बालेन शाह?

कविता गाडरी   |  08 Mar 2026 10:01 AM (IST)

नेपाल में संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था है और वहां की संसद दो सदनों से मिलकर बनी. इनमें निचला सदन प्रतिनिधि सभा और ऊपरी सदन राष्ट्रीय सभा कहलाता है.प्रतिनिधि सभा को भारत की लोकसभा की तरह माना जाता है.

नेपाल में कैसे काम करती है संसदीय व्यवस्था, PM बनने के बाद कितने ताकतवर होंगे बालेन शाह?

नेपाल संसदीय व्यवस्था कैसे काम करती है?

नेपाल के संसदीय चुनाव के नतीजे देश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं. शुरुआती रुझानों में काठमांडू के पूर्व मेयर और युवा नेता बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. 35 वर्षीय बालेन शाह की पार्टी कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. ऐसे में उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है. वहीं नेपाल में पिछले काफी समय से युवाओं के बीच राजनीति को लेकर बढ़ती सक्रियता देखने को मिली है. पिछले साल हुए जेन जी आंदोलन के बाद देश में यह पहला आम चुनाव है. उस आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था और सांसद भंग कर दी गई थी.

अब हुए चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है. ऐसे में बालेन शाह प्रधानमंत्री बनते हैं तो यह नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि नेपाल में संसदीय व्यवस्था कैसे काम करती है और प्रधानमंत्री बनाने के बाद बालेन शाह कितने ताकतवर होंगे. कैसे काम करती है नेपाल की संसदीय व्यवस्था? नेपाल में संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था है और वहां के संसद दो सदनों से मिलकर बनी है. इनमें निचला सदन प्रतिनिधि सभा और ऊपरी सदन राष्ट्रीय सभा कहलाता है. प्रतिनिधि सभा को भारत की लोकसभा की तरह माना जाता है और असली राजनीतिक ताकत से इसी सदन के पास होती है. नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कुल 275 सदस्य होते हैं. इनमें 125 सदस्य सीधे चुनाव के जरिए चुने जाते हैं. जबकि बाकी 110 सीटों पर प्रपोशनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम के जरिए प्रतिनिधि चुने जाते हैं. इस प्रणाली में मतदाता किसी उम्मीदवार के बजाय पार्टी को वोट देते हैं और जिस पार्टी को जीतने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में सीटें मिलती है. ये भी पढ़ें-पहली बार कब मनाया गया था अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस? क्यों पड़ी थी इसकी जरूरत

नेपाल में सरकार बनाने का गणित नेपाल में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत हासिल करना जरूरी होता है. इसके लिए कम से कम 138 सीटों का समर्थन चाहिए. चुनाव के नतीजे के बाद जिस पार्टी या गठबंधन के पास बहुमत होता है. उसी का नेता प्रधानमंत्री बनता है. प्रधानमंत्री बनने के बाद सरकार की नीतियां तय करने, प्रशासन चलाने और संसद में विधेयक पेश करने की जिम्मेदारी उसी के पास होती है. हालांकि कानून बनाने के लिए दोनों सदनों की मंजूरी होती है. नेपाल में प्रधानमंत्री की भूमिका नेपाल में राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है और सेना का सुप्रीम कमांडर भी माना जाता है. हालांकि सरकार चलाने की असली ताकत प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है. प्रधानमंत्री ही सरकार के कामकाज का नेतृत्व करते हैं और प्रशासनिक फैसले लेते हैं. संसद में बहुमत होने की स्थिति में प्रधानमंत्री की राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है.

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Published at: 08 Mar 2026 10:01 AM (IST)
Tags:नेपालnepal prime ministerNepal ElectionBalen ShahNepal parliamentary system
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