Female Workforce Participation: भारत की महिला श्रम बल भागीदारी दर तेजी से बढ़ रही है. यह 2017-18 में 23.3% से बढ़कर 2023-24 में लगभग 41.7% हो गई है. 2025-26 के मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि देश के कुल कार्यबल में महिलाएं लगभग एक तिहाई या 33% से ज्यादा हैं. यह बढ़ोतरी एक बड़े बदलाव का प्रतीक है. 

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महिला कार्यबल दोगुना हो गया है 

भारत का महिला कार्यबल लगभग 6 सालों में दोगुना हो गया है. 2018 में लगभग 100 मिलियन महिलाएं कार्यबल में थीं. 2024-25 तक यह संख्या बढ़कर 200 मिलियन से ज्यादा हो गई. इन आंकड़ों से बदलाव के पैमाने पता चलते हैं. हालांकि भागीदारी दर और कुल श्रमिक संख्या अलग-अलग उपाय हैं और दोनों अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बदलती भूमिका को बताने में मदद करते हैं. 

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ग्रामीण भागीदारी शहरी स्तर से ज्यादा 

शहरों की तुलना में ग्रामीण भारत में महिला श्रम शक्ति की भागीदारी काफी ज्यादा है. शहरी क्षेत्र में लगभग 25.9% की तुलना में ग्रामीण भागीदारी लगभग 47.6% तक पहुंच गई है. अंतर से यह पता चलता है कि महिलाओं की व्यस्तता स्थान के अनुसार अलग-अलग होती है. ग्रामीण रोजगार को बढ़ोतरी में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में पहचाना जाता है. इसी के साथ कम शहरी दर देश भर में समान भागीदारी को दर्शाती है.

स्व रोजगार और पारिवारिक कार्य 

ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती ग्रामीण भागीदारी के पीछे मुख्य वजहों के रूप में पारिवारिक व्यवस्थाओं और कृषि में सहायक के रूप में  स्व रोजगार और बिना किसी वेतन के काम की पहचान करती है. इस तरह के काम में घरेलू खेती का समर्थन करना या फिर पारिवारिक बिजनेस को चलाने में मदद करना शामिल है. 

ये भूमिकाएं आर्थिक गतिविधि में योगदान देते हैं. हालांकि बिना वेतन के पारिवारिक काम करना वेतन भोगी रोजगार से अलग होता है. भागीदारी के आंकड़ों और महिलाओं के लिए मौजूद अवसरों की व्याख्या करते समय यह अंतर मायने रखता है.

महिलाओं को रोजगार देने वाले क्षेत्र 

महिलाएं कृषि, डेयरी, पशुपालन, शिक्षा और खुदरा व्यापार में खास तौर से सक्रिय हैं. रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 50% है. ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत भागीदारी के अनुरूप, कृषि और संबंधित ग्रामीण गतिविधियां भी जरूरी हैं. यह क्षेत्र अलग-अलग प्रकार के काम और रोजगार व्यवस्थाओं में महिलाओं के योगदान को दर्शाते हैं. 

सोलोमन द्वीप वैश्विक स्तर पर सबसे आगे 

विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के हालिया आंकड़ों से यह पता चलता है कि अफ्रीका और प्रशांत क्षेत्र के देशों सहित कई विकासशील देशों में भारत की तुलना में महिला भागीदारी दर सबसे ज्यादा है. सोलोमन द्वीप में दुनिया की सबसे ऊंची दर, लगभग 81% दर्ज की गई है. तंजानिया लगभग 78.5% के साथ दूसरे स्थान पर है. यहां महिलाएं मुख्य रूप से कृषि में लगी हुई हैं. ये दरें श्रम बल भागीदारी को मापती हैं ना कि महिला श्रमिकों की पूरी संख्या को.

बेनिन, नाइजर और लाइबेरिया में भी उच्च स्थान पर हैं 

बेनिन में महिला श्रम बल भागीदारी दर लगभग 73.5% दर्ज की गई है. इसी के साथ नाइजर में लगभग 72.4% है. लाइबेरिया लगभग 70.3% के साथ दूसरे स्थान पर है. इसका मतलब है कि वहां लगभग 10 में से 7 महिलाएं आर्थिक रूप से सक्रिय हैं. ये देश भाग लेने वाले देशों में सोलोमन द्वीप और तंजानिया में शामिल हैं. उनकी रैंकिंग से पता चलता है कि उच्च भागीदारी दर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है.

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चीन और विकसित अर्थव्यवस्थाएं 

प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्था में चीन में तुलनात्मक रूप से मजबूत महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर लगभग 61% है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और अलग-अलग यूरोपीय देशों में दर औसत 55% और 60% के बीच है. 

भारत की बढ़ती भागीदारी उल्लेखनीय है लेकिन यह वैश्विक लीडर के लिए सूचीबद्ध दरों से नीचे है. आंकड़े अंतरराष्ट्रीय भागीदारी दरों के साथ राष्ट्रीय प्रगति की तुलना के महत्व को रेखांकित करते हैं.

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