प्रवर्तननिदेशालययानीईडीकीकार्रवाईकोलेकरविपक्षकेंद्रसरकारपरभेदभावकेआरोपलगातेरहाहै. वहींहालहीमें संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार ने ईडी से जुड़े मामलों को लेकर डाटा जारी किया है. लोकसभा में सरकार ने 2014-15 से लेकर 2025 तक प्रवर्तन निदेशालय और इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई का डेटा पेश किया है. इसमें दर्ज किए गए कीगईरेड, चार्जशीटऔरसजासेजुड़ेजरूरीआंकड़ेशामिलहै. ऐसेमेंचलिएआजहमआपकोबतातेहैंकि 2014 सेअबतकईडीऔरइनकमटैक्सनेकितनेमामलेदर्जकिएहैं.
2014 सेअबतक ईडीनेदर्जकिए 6000 सेज्यादाकेस
लोकसभामेंसरकारकीओरसेदिएगएआंकड़ोंकेअनुसारईडीने 2014-15 सेनवंबर 2025 तककुल 6,444 ईसीआईआरएसदर्जकी. वहींकईसालऐसेभीरहेजबकेसोंकीसंख्यामेंअचानकबढ़ोतरीदेखनेकोमिली.
ईडीके 2014 से 2025 तककेकेस
- साल केस
- 2014-15- 181
- 2015-16-110
- 2016-17- 187
- 2017-18- 163
- 2018-19-152
- 2019-20-557
- 2020-21- 996
- 2021-22- 1116
- 2022-23- 953
- 2023-24- 698
- 2024-25- 775
- 2025 नवंबरतक- 556
सरकारके एक अन्य डेटासेट के अनुसार, 1 जून 2014 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच ईडी ने कुल 6,312 पीएमएलए वाले मामले दर्ज किए हैं. इन दोनों ही रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 10 सालों में मनीलाॅन्ड्रिंग के मामलों में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई है.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 13,000 से ज्यादा चार्जशीट की दायर
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2014 से 2025 के बीच में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है. सरकार के अनुसार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2014-15 से 2025 के बीच कुल 13,877 चार्जशीट कोर्ट में दायर की है.
इनकम टैक्स की चार्जशीट 2014 से 2025
- साल चार्जशीट
- 2014-15- 669
- 2015-16- 552
- 2016-17-1252
- 2017-18- 4527
- 2018-19- 3512
- 2019-20-1226
- 2020-21-173
- 2021-22-195
- 2022-23-387
- 2023-24- 502
- 2024-25- 611
- 2025 सितंबर तक- 271
2014 से अब तक देशभर में हुई 20,000 से ज्यादा रेड
ईडी और इनकम टैक्स दोनों ने मिलकर पिछले 11 सालों में 20, 000 से ज्यादा रेड की. ईडी ने 11,106 रेड की, वहीं इनकम टैक्स ने 2014 से नवंबर 2025 तक 9,657 ग्रुप पर सर्चऑपरेशन किया. इस रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 ईडी का सबसे एक्टिव साल रहा, जिसमें एजेंसी ने 2,600 रेड की थी. इसके अलावा सरकार की तरफ से पेश किए डेटा के अनुसार ईडी के मामलों में दोष सिद्ध होने की दर सबसे ऊंची रही है. 2014 से नवंबर 2025 के बीच पीएमएलएकोर्ट्स ने 56 मामलों में फैसला सुनाया. इनमें से 53 मामलों में 121 लोगों को दोषी करार दिया, जिसका मतलब है कि दोषसिद्धि दर 94.64 प्रतिशत रही.
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