ISS Food System: अंतरिक्ष में खाना बनाना पृथ्वी पर खाना बनाने जैसा बिल्कुल भी नहीं है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर गैस स्टोव, खुली आग, माइक्रोवेव या फिर पारंपरिक ओवन नहीं होते. अंतरिक्ष के माइक्रोग्रैविटी माहौल में छोटी सी आग भी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है. इसके बजाय अंतरिक्ष यात्री खासतौर पर डिजाइन किए गए फूड सिस्टम पर ही निर्भर होते हैं. यह सिस्टम खाना सुरक्षित रूप से तैयार करने के लिए एडवांस्ड प्रिजर्वेशन तकनीक, सटीक पानी डालने की सुविधा और कंडक्शन आधारित हीटिंग का इस्तेमाल करते हैं.
अंतरिक्ष में आग का इस्तेमाल क्यों नहीं?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर खुली आग का इस्तेमाल नहीं किया जाता क्योंकि स्टेशन के ऑक्सीजन कंट्रोल्ड माहौल में इससे आग लगने का काफी ज्यादा खतरा होता है. माइक्रोग्रैविटी में गर्म हवा पृथ्वी की तरह ऊपर नहीं उठती. इस वजह से आग की लपटें अजीब तरह से व्यवहार करती हैं और आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि अंतरिक्ष यात्री पारंपरिक खाना पकाने के उपकरणों के बजाय खास तौर पर बनाए गए उपकरणों का ही इस्तेमाल करके खाना तैयार करते हैं.
स्पेस फूड को कैसे बांटा गया है?
नासा की स्पीड फूड सिस्टम लैबोरेट्री अंतरिक्ष यात्रियों के खाने को उनकी शेल्फ लाइफ और तैयारी की जरूरतों के आधार पर छह श्रेणियों में बांटती है. रीहाइड्रेटेड होने वाले खाने से फ्रीज ड्राइंग के जरिए लगभग सारा पानी निकाल दिया जाता है. सूप, नूडल्स और श्रिंप कॉकटेल जैसे खाने कई सालों तक सुरक्षित रह सकते हैं. जब तक की अंतरिक्ष यात्री खाने से पहले उसमें पानी ना मिला लें.
थर्मोस्टेबिलाइज्ड खाने को हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए उच्च तापमान और दबाव पर पकाया जाता है. करी, स्टू और मछली जैसे नमी वाले खाने पाउच या फिर कैन में सील किए जाते हैं और दोबारा गर्म करने के लिए तैयार होते हैं.
इरेडिएटेड खाने बनावट बनाए रखते हुए खाने की सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए आयनाइजिंग रेडिएशन ट्रीटमेंट से गुजारा जाता है. चिकन और बीफ जैसे मीट प्रोडक्ट आमतौर पर इसी श्रेणी में आते हैं.
प्राकृतिक रूप वाले खाने को तैयार करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती. बादाम, काजू, कुकीज और चॉकलेट जैसी चीजें सीधे अपनी पैकेजिंग से निकाल कर खाने के लिए तैयार होती हैं.
इंटरमीडिएट मॉइश्चर वाले खाने में इतनी नमी होती है कि वे नरम और चबाने में आसान रहते हैं. साथ ही उनकी शेल्फ लाइफ भी लंबी होती है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण सूखे मेवे हैं.
फ्रीज ड्राइड खाने में पानी कैसे मिलाया जाता है?
अंतरिक्ष यात्री माइक्रोग्रैविटी के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए गैली वॉटर डिस्पेंसर का इस्तेमाल करते हैं. हर फ्रीज ड्राइड फूड पाउच में एक रबर का वॉल्व होता है जिसे सेप्टम कहा जाता है. पानी के डिस्पेंसर से निकली एक सुई इस वॉल्व में छेद करती है. इससे हवा बाहर निकले बिना या फिर केबिन में पानी लीक हुए बिना पानी पैकेट के अंदर जा पाता है.
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अंतरिक्ष यात्री बिना स्टोव के खाना कैसे गर्म करते हैं?
आग की लपटों या फिर गर्म हवा का इस्तेमाल करने के बजाय अंतरिक्ष यात्री कंडक्शन हीटिंग पर निर्भर रहते हैं. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के अमेरिकी हिस्से में खाने को गर्म करने वाले उपकरण छोटे ब्रीफकेस जैसे होते हैं. इनमें गर्म एल्युमिनियम प्लेट होती हैं. खाने के पैकेट इन प्लेटों के बीच कसकर दबाए जाते हैं ताकि गर्मी सीधे खाने तक पहुंचे.
रूस के हिस्से में स्लॉट वाली मेटल हीटिंग ट्रे का इस्तेमाल किया जाता है. इनमें खाने के कंटेनर मजबूती से फिट हो जाते हैं और उन्हें सीधी गर्मी मिलती है. क्योंकि माइक्रोग्रैविटी में सब कुछ तैरता रहता है इस वजह से हीटिंग प्रक्रिया के दौरान स्प्रिंग क्लिप और मैग्नेटिक होल्डर खाने के पैकेट को अपनी जगह पर मजबूती से बनाए रखते हैं.
खाना गर्म होने में कितना समय लगता है?
क्योंकि गर्मी गर्म हवा के घूमने के बजाय सीधे संपर्क से धीरे-धीरे पहुंचती है, इस वजह से अंतरिक्ष यात्रियों को खाने के पैकेट के पूरी तरह गर्म होने के लिए आमतौर पर 20 से 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है.
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