South Kali Peeth: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और शिव आराधना का आयोजन होता है. हरिद्वार स्थित दक्षिण काली पीठ में भी इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है. यहां आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज पूरे सावन मास में विशेष रुद्राभिषेक और भगवान शिव की साधना में लीन हैं.
इसी बीच रुद्राभिषेक के दौरान उपस्थित कुछ श्रद्धालुओं ने ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया. श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें पूजा के दौरान 18 नाग देवताओं के बाल स्वरूप में दर्शन हुए. उन्होंने इसे भगवान शिव की विशेष कृपा और दिव्य अनुभूति बताया.
पूरे सावन मौन व्रत के साथ शिव आराधना कर रहे हैं स्वामी कैलाशानंद गिरी:
दक्षिण काली पीठ में सावन की शुरुआत से ही विशेष धार्मिक अनुष्ठान जारी हैं. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज पूरे सावन मास मौन व्रत का पालन करते हुए भगवान भोलेनाथ की आराधना कर रहे हैं. प्रतिदिन वैदिक परंपरा के अनुसार रुद्राभिषेक, मंत्रोच्चार और शिव पूजा संपन्न हो रही है.
मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. भक्त जल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं.
रुद्राभिषेक के दौरान 18 नाग देवताओं के बाल स्वरूप दर्शन का दावा:
रुद्राभिषेक के समय मौजूद कुछ श्रद्धालुओं ने दावा किया कि पूजा के दौरान उन्हें 18 नाग देवताओं के बाल स्वरूप के दर्शन हुए. श्रद्धालुओं के अनुसार यह अनुभव सामान्य नहीं था, बल्कि उनके लिए गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का क्षण था.
उनका कहना है कि उन्होंने इस दृश्य को भगवान शिव की कृपा के रूप में महसूस किया. कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन के सबसे यादगार धार्मिक अनुभवों में से एक बताया. मंदिर में मौजूद अन्य भक्त भी इस घटना को लेकर आपस में चर्चा करते नजर आए.
वैदिक मंत्रोच्चार और शिवभक्ति से गूंज रहा है मंदिर परिसर:
सावन के पावन अवसर पर दक्षिण काली पीठ का वातावरण पूरी तरह शिवमय बना हुआ है. रुद्राभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण, शंखध्वनि और शिव स्तुति से पूरा परिसर भक्तिमय हो जाता है.
दूर-दराज के राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना में भाग ले रहे हैं. कई श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक करवा रहे हैं. मंदिर में श्रद्धा और अनुशासन का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव करा रहा है.
सावन में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व:
हिंदू मान्यताओं के अनुसार सावन माह में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करने पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
इसी कारण सावन के दौरान देशभर के शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. हरिद्वार का दक्षिण काली पीठ भी इस समय प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
आस्था और श्रद्धा का संदेश देता सावन:
सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, संयम और भगवान शिव के प्रति समर्पण का भी प्रतीक माना जाता है. दक्षिण काली पीठ में रुद्राभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा साझा किया गया यह अनुभव भी आस्था से जुड़ा विषय है, जिसे भक्त अपनी व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में देख रहे हैं.
मंदिर में जारी विशेष शिव साधना, मौन व्रत, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तों की अटूट श्रद्धा सावन के आध्यात्मिक महत्व को और अधिक विशेष बना रही है. आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना है, जहां वे भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर अपनी आस्था को और प्रगाढ़ बना सकेंगे.
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