Rehman Dakait: Dhurandar फिल्म की चर्चा अभी हर जगह बड़े जोर शोर से हो रही है. आदित्य धर की फिल्म में सबसे ज्यादा चर्चा रणवीर सिंह के किरदार हमजा की है तो उससे भी कई ज्यादा चर्चा लोग रहमान डकैत का किरदार निभाने वाले अक्षय खन्ना की कर रहे हैं. 'शेर-ए-बलोच' गाने पर उनकी एंट्री का वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रहा है. ऐसे में कई लोग कह रहे है कि रहमान डकैत असल जिंदगी में इससे भी ज्यादा खतरनाक था. दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि रहमान डकैत इतना बड़ा गैंगस्टर नहीं था. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने मूवी में पहली बार रहमान डकैत के बारे में सुना. आइए आपको रहमान डकैत के बारे में सबकुछ बताते हैं.

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रहमान डकैत कौन था?

रहमान डकैत का जन्म कराची में हुआ था. यह वह जगह थी, जहां उस समय लोकल गैंगस्टर अपना डर बनाने में लगे हुए थे. यह वहीं ल्यारी है, जहां लड़कों पर एक समय फुटबॉल खेलने का क्रेज था. जैसे-जैसे समय बदला यहां पर फुटबॉल के क्रेज की जगह गैंगस्टरों ने ले ली. 

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90 के दशक में यहां सबसे पहले बाबू डकैत के नाम से प्रसिद्ध पढ़े लिखे गैंगस्टर इकबाल ने अपना दबदबा बनाया था. वह यहां पर ड्रग्स का धंधा किया करता था. पुलिस तक उसके खिलाफ जाने से डरती थी. हर कहानी में हर किसी का कोई न कोई दुश्मन जरूर होता है. इसी तरह इस कहानी में इकबाल का दुश्मन दादल था. बाबू ने उसे मार अपना दबदबा बनाए रखा. दादल के बाद लेकिन उस जगह पर एक खालीपन आया, जिससे बाद आगे चलकर बीटा सरदार रहमान बलोच उर्फ रहमान डकैत उस खालीपन को भरने वाला था. 

रहमान वह आदमी था, जिसके कोई भी नियम नहीं थे. 13 साल की उम्र में उसने अपनी मां का खून कर शव को पंखे से लटका दिया था. उसने यह इसलिए किया क्योंकि उसे शक था कि उसकी मां का अफेयर चल रहा है. इसके बाद रहमान डकैत का डर हर जगह फैल गया. लोगों ने कहा कि जो व्यक्ति अपने मां को मार सकता है. वह किसी को भी मार सकता है. इसी रहमान ने 2007 में एयरपोर्ट में एक ब्लास्ट के बाद खुद गाड़ी चला बेनजीर भुट्टो को सुरक्षित घर तक पहुंचाया था. 

कई लोगों की कहानी में रहमान डकैत मसीहा

रहमान डकैत को कई लोगों की कहानी में किसी भगवान से कम दर्जा नहीं दिया जाता. कई लोगों का कहना था कि रहमान डकैत गरीब लड़कियों का इलाज, उनकी शादी और लोगों की मदद करता था. कई लोगों का कहना था कि रहमान डकैत के राज में ड्रग्स, चोरी यह सब नहीं होते थे. अगर कोई व्यक्ति ड्रग्स सप्लाई करता, तो उसको तीन बार वॉर्निग दी जाती थी और अंत में सुधार न होने के बाद, उनके घरों में उस व्यक्ति की लाश को भेजा जाता था. 

रहमान के दुश्मन

रहमान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा था. उसका दुश्मन हाजी लालू का बेटा अरशद पप्पू रहमान डकैत पर हमला करने के लिए तैयार हो रहा था. पप्पू ने कब्रिस्तान जाकर रहमान के पिता दादल की कब्र को तोड़ दिया. इसके बाद उसने रहमान के चाचा को बीच सड़क पर घेर गोलियों से भून दिया. रहमान धीरे-धीरे बदले की आग में जल रहा था. उसे यह नहीं पता था कि धीरे-धीरे उसके दुश्मन भी बढ़ते जा रहे थे.

इसी बीच एक नया पन्ना आता है. इसमें रहमान डकैत का एनकाउंटर करने के लिए SP चौधरी असलम को बुलाया जाता है. चौधरी असलम को रहमान के एनकाउंटर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. 2006 में वह रहमान को जेल में डालने में सफल भी हुए लेकिन पुलिस अधिकारियों को पांच करोड़ की रिश्वत दे कर रहमान जेल से बाहर आ गया. 2009 में चौधरी असलम अपने काम में सफल हुए. पांच घंटे के स्पेशल ऑपरेशन के बाद खबर आई कि रहमान डकैत का एनकाउंटर हो चुका है.  

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