छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के खिलाफ जंग अब केवल गोलियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके खजाने पर भी जोरदार प्रहार किया गया है. माओवादी इतिहास की सबसे बड़ी रिकवरी में सुरक्षाबलों के हाथ करोड़ों का सोना और कैश लगा है. बस्तर के जंगलों में छिपाकर रखा गया यह 11 करोड़ का सोना अब सरकारी खजाने का हिस्सा बनेगा या नहीं, इसे लेकर कानूनी प्रक्रियाएं तेज हो गई हैं. आइए जानते हैं.

Continues below advertisement

माओवादी इतिहास की सबसे बड़ी रिकवरी

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है. पूना मारगेम अभियान के तहत माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण के साथ ही सुरक्षाबलों ने एक ऐसी बरामदगी की है, जिसने सबको चौंका दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, यह माओवादी इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय रिकवरी है. जवानों ने नक्सलियों के पास से कुल 14 करोड़ 6 लाख रुपये की संपत्ति बरामद की है. इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि नक्सली संगठन केवल विचारधारा की लड़ाई नहीं, बल्कि अवैध वसूली के दम पर अपना साम्राज्य फैला रहे थे.

Continues below advertisement

क्या सरकार बेच सकती है यह सोना?

इस बड़ी बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इस 11 करोड़ के सोने को बेच सकती है? कानूनी जानकारों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, एंटी-नक्सल ऑपरेशंस के दौरान जब्त किया गया सोना और अन्य कीमती सामान राज्य की संपत्ति माना जाता है. हालांकि, इसे सीधे नहीं बेचा जा सकता है. इसकी एक लंबी कानूनी प्रक्रिया होती है. पुलिस या एनआईए (NIA) जैसी एजेंसियां पहले इन संपत्तियों को जब्त करती हैं और अदालत में यह साबित करती हैं कि यह पैसा या सोना अवैध उगाही और आतंकी गतिविधियों के लिए इकट्ठा किया गया था. 

यह भी पढ़ें: Petrol Diesel Price Increased: क्या पेट्रोल-डीजल के दाम मनमर्जी से बढ़ा सकती हैं कंपनियां, जानें भारत में इसके क्या नियम?

जब्ती और नीलामी की कानूनी प्रक्रिया

एक बार जब कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं और कोर्ट यह मान लेता है कि यह संपत्ति अवैध है, तो इसे आधिकारिक तौर पर कॉन्फिस्केट यानी कुर्क कर लिया जाता है. इसके बाद सरकार के पास यह अधिकार होता है कि वह इस सोने को सरकारी खजाने में जमा कर दे या फिर इसकी नीलामी करके इसे बेच दे. इस प्रक्रिया से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अक्सर नक्सल विरोधी अभियानों को फंड करने, सुरक्षाबलों के आधुनिकीकरण या आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास के लिए किया जाता है.

नक्सलियों की वित्तीय कमर पर चोट

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में सोने की बरामदगी नक्सलियों के वित्तीय तंत्र के लिए एक घातक प्रहार है. नक्सली संगठन अक्सर व्यापारियों और ठेकेदारों से उगाही गई रकम को सोने में बदल देते हैं. सोना छिपाने में आसान होता है और समय के साथ इसकी कीमत भी बढ़ती है. मार्च और अप्रैल 2026 में हुई इन बड़ी बरामदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षाबलों की रणनीति अब नक्सलियों की रसद और पैसे की सप्लाई लाइन को पूरी तरह से काट देने की है.

यह भी पढ़ें: क्या अपने डिमोशन की खुद मांग कर सकते हैं IAS? रिंकू सिंह राही केस से समझें नियम