दुनिया में जब भी कभी भीषण युद्ध या फिर परमाणु हमले का खतरा होता है, तो इंसानी सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. ऐसे संकट से निपटने के लिए उत्तरी यूरोप के देश फिनलैंड ने एक अद्भुत मिसाल पेश की है. देश की राजधानी हेलसिंकी की खूबसूरत सड़कों और इमारतों के ठीक नीचे एक पूरा का पूरा अंडरग्राउंड शहर बना हुआ है. इसे स्थानीय लोग सेकेंड सिटी के नाम से जानते हैं. जमीन के भीतर चट्टानों को काटकर तैयार की गई यह व्यस्था दुनिया के सबसे सुरक्षित ठिकानों में गिनी जाती है, जहां पर किसी भी तरह का एटमी हमला, जहरीली गैस या फिर जैविक हथियार बेअसर हो जाते हैं.
कब और क्यों बनाया गया यह सुरक्षित मॉडल?
फिनलैंड का यह सुरक्षा मॉडल रातों-रात बनकर तैयार नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे एक कड़वा ऐतिहासिक सबक छिपा हुआ है. साल 1939 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब सोवियत रूस ने फिनलैंड पर हमला किया था, जिसे विंटर वॉर के नाम से जाना जाता है, तभी से इस देश ने सुरक्षा की योजना बनाना शुरू कर दिया था. उस समय से लेकर आज तक फिनलैंड की सरकार ने पूरे देश में 5500 से भी ज्यादा अत्याधुनिक शेल्टर या बंकर तैयार किए हैं.
यहां कितने लोगों को मिल सकती है पनाह
हेलसिंकी शहर की कुल जनसंख्या करीब 6,75,000 है, लेकिन जमीन के नीचे बने इन अंडरग्राउंड बंकरों की क्षमता लगभग 10 लाख लोगों को एकसाथ पनाह देने की है. यानी शहर के हर नागरिक के अलावा बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए भी यहां पर पर्याप्त जगह मौजूद है. इस तैयारी को कानूनी रूप देने के लिए फिनलैंड सरकार ने साल 1954 में एक सख्त नियम बना दिया था. इसके तहत अगर कोई भी नई इमारत 1200 वर्ग मीटर से बड़ी बनाई जाती है तो उसके बेसमेंट में बम निरोधक शेल्टर बनाना बेहद जरूरी और अनिवार्य है.
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क्या है इस न्यूक्लियर शेल्टर की खासियत?
जमीन से करीब 25 मीटर यानी 80 फीट की गहराई में बने ये बंकर किसी आधुनिक शहर से कम नहीं हैं. उदाहरण के तौर पर साल 2003 में तैयार किया गया 71,000 क्यूबिक मीटर का शेल्टर लगभग सात मंजिला इमारत जितना बड़ा है. इसमें स्विमिंद पूल, स्पोर्ट्स पिच, जिम और बच्चों के खेलने के लिए पार्क बनाए गए हैं. इसके मेन गेट पर नीले रंग के दो भारी ब्लास्ट डोर यानी धमाका-रोधी दरवाजे लगे हैं. पहला दरवाजा किसी भी विशाल बम विस्फोट की तेज शॉक वेव्स को सोख लेता है, जबकि दूसरा दरवाजा खतरनाक रसायनों, जैविक हमलावर तत्वों और परमाणु विकिरण को अंदर घुसने से पूरी तरह रोकता है.
72 घंटे में इमरजेंसी की तैयारी
इन बंकरों की सबसे खास बात यह है कि इनको बंद करके बेकार छोड़ नहीं दिया जाता है. आम दिनों में यहां स्थानीय नागरिक खेल-कूद, जिमिंग और बाकी गतिविधियों के लिए आते रहते हैं, ताकि उनको जमीन के नीचे समय बिताने की आदत बनी रहे. अगर कभी देश में कोई आपातकाल स्थिति या फिर युद्ध छिड़ जाता है तो इन सार्वजनिक जगहों को 72 घंटे के अंदर एक विशाल सुरक्षित शिविर में तब्दील कर दिया जाता है. यहां पर तुरंत बंक बेड, पीने के पानी की बड़ी टंकियां और पोर्टेबल टॉयलेट फिट कर दिए जाते हैं, जिससे यहां पर महीनों तक सुरक्षित बिना किसी परेशानी के रह सकते हैं.
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