Farmer Suicides India : किसानों की आत्महत्या आज भी देश के सामने एक गंभीर समस्या बनी हुई है. भारत में बड़ी संख्या में लोग खेती पर निर्भर हैं, लेकिन किसान आत्महत्या के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं. किसानों को कई तरह की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. फसल खराब होने, कर्ज बढ़ने, खेती पर ज्यादा खर्च होने और उपज की सही कीमत नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है. इन परेशानियों का असर सिर्फ किसान की कमाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है. लगातार आर्थिक नुकसान और कर्ज का दबाव परिवार के लिए चिंता और परेशानी का कारण बन जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि किसान किन वजहों से सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं और किस राज्य में सबसे ज्यादा है. 

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किसान किन वजहों से सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं?

किसान आत्महत्याओं के पीछे सबसे प्रमुख कारणों में कर्ज और आर्थिक संकट शामिल है. कई छोटे और सीमांत किसान खेती के लिए बैंक या निजी साहूकारों से कर्ज लेते हैं. फसल खराब होने या आमदनी कम होने पर उनके लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है. लंबे समय तक बढ़ता कर्ज और ब्याज किसानों को गंभीर आर्थिक दबाव में डाल देता है. किसानों की स्थिति को लेकर किए गए एक अध्ययन में भी सामने आया कि कर्ज, फसल खराब होने और निजी साहूकारों से लिए गए कर्ज किसानों की परेशानी के बड़े कारणों में शामिल हैं. वहीं किसान आत्महत्याओं के पीछे आर्थिक संकट के साथ सामाजिक और मानसिक दबाव भी जरूरी भूमिका निभाते हैं.

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फसल खराब होने और मौसम का असर

खेती की सफलता काफी हद तक मौसम पर निर्भर रहती है. अनियमित मानसून, सूखा, कीटों का हमला और बार-बार फसल खराब होने से किसानों की इनकम प्रभावित होती है. महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों में जलवायु और पानी से जुड़ी समस्याओं ने कृषि संकट को और बढ़ाया है. 

खेती की लागत बढ़ी, आमदनी पर दबाव

बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, मजदूरी और कृषि डिवाइस की लागत बढ़ने से किसानों पर खर्च का बोझ बढ़ा है. वहीं दूसरी ओर कई बार बाजार में फसल की कीमत उत्पादन लागत के मुकाबले काफी कम मिलती है. सुनिश्चित खरीद की कमी और बिचौलियों पर निर्भरता भी किसानों की परेशानी बढ़ाती है. 

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किस राज्य में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्याएं?

NCRB के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, खेती से जुड़े क्षेत्र में 10,786 आत्महत्याएं दर्ज की गईं. इनमें 4,690 किसान या cultivators और 6,096 कृषि मजदूर थे. कुल मामलों में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 38.5 प्रतिशत रही, जो सबसे ज्यादा थी. इसके बाद कर्नाटक 22.5 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश 8.6 प्रतिशत, मध्य प्रदेश 7.2 प्रतिशत और तमिलनाडु 5.9 प्रतिशत के साथ प्रमुख राज्यों में रहे. 

किसान आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले मराठवाड़ा 

2026 में जनवरी से जून के बीच महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में 465 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए. इनमें छत्रपति संभाजीनगर में 109, बीड में 95, धाराशिव में 65, नांदेड में 61, जालना में 40, हिंगोली में 35, परभणी में 34 और लातूर में 26 मामले सामने आए. 

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