Extra Marital Affair: अक्सर हम अखबारों या सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें देखते हैं जहां किसी होटल में पुलिस छापा मारती है और कपल्स को बाहर निकाला जाता है. कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अब क्राइम नहीं है, तो फिर पुलिस को दखल देने का हक कहां से मिलता है. आइए जानते हैं कि असली नियम क्या कहता है.
2018 का फैसला - अफेयर अब अपराध नहीं
साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जोसेफ शाइन बनाम भारत संघ मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया था. इस फैसले में कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था. पहले इस धारा के तहत अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी दूसरी महिला से बिना उसके पति की सहमति के संबंध बनाता था, तो उसे जेल हो सकती थी.
कोर्ट ने कहा कि यह कानून महिला को पुरुष की संपत्ति जैसा मानता है, जो बराबरी के अधिकार के खिलाफ है. इसके बाद से एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर भारत में क्रिमिनल ऑफेंस नहीं रेहता है.
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फिर होटल में पुलिस क्यों पहुंचती है?
जब कानूनन यह अपराध ही नहीं है, तो पुलिस के पहुंचने की असली वजहें कुछ और होती हैं. ज्यादातर मामलों में या तो नाराज पति या पत्नी खुद पुलिस को शिकायत देते हैं, जिसमें अक्सर "किडनैपिंग" या "लापता होने" जैसा झूठा या अधूरा आरोप लगाया जाता है, जिसकी जांच के लिए पुलिस को जाना पड़ता है. कुछ मामलों में फर्जी पत्रकार बनकर लोग कपल्स को ब्लैकमेल और वसूली करने की नीयत से भी होटल पहुंचते हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी होता है.
बालिग कपल्स के असली अधिकार
अगर दोनों लोग बालिग हैं और आपसी सहमति से होटल में ठहरे हैं, तो उन्हें प्राइवेसी का पूरा अधिकार है. जिसका मतलब है पुलिस या कोई भी संगठन बिना ठोस वजह या शिकायत के उन्हें परेशान, धमकी या ब्लैकमेल नहीं कर सकता. अगर किसी को गैरकानूनी तरीके से रोका, धमकाया या पैसे वसूलने की कोशिश की जाती है, तो पीड़ित उसी थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है और कानूनी कार्रवाई की मांग कर सकता है. यही वजह है कि हर व्यक्ति को अपने अधिकार और कानून की सही जानकारी होना जरूरी है.
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