आज हमारे घरों में खाना खराब न हो, इसके लिए फ्रिज एक जरूरी चीज बन चुका है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों साल पहले जब फ्रिज तो दूर, बिजली तक नहीं थी, तब आदिमानव अपना खाना कैसे सुरक्षित रखते थे? जवाब जानकर आप हैरान रह जाएंगे, क्योंकि उस दौर के इंसानों ने प्रकृति की मदद से ही ऐसे तरीके खोज निकाले थे, जो आज भी कई जगह इस्तेमाल होते हैं. विज्ञान और इतिहासकारों ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है, और इसका जवाब आपको सच में हैरान कर देगा.
बर्फ और ठंडी जगहों का इस्तेमाल
आदिमानव सबसे पहले प्रकृति में मौजूद ठंडी जगहों का सहारा लेते थे. पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग बर्फ और बर्फीली गुफाओं में खाना रख देते थे. ठंडे तापमान की वजह से मांस और दूसरी खाने की चीजें जल्दी खराब नहीं होती थीं. यहां तक कि कुछ समुदाय जमीन में गहरे गड्ढे खोदकर उसमें खाना दबा देते थे, क्योंकि जमीन के अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले हमेशा ठंडा और स्थिर रहता है.
धूप में सुखाना
खाने को सुरक्षित रखने का एक और आसान तरीका था, उसे धूप में सुखाना. आदिमानव मांस, मछली और फलों को पतले टुकड़ों में काटकर धूप में या आग के पास सुखा देते थे. ऐसा करने से खाने में मौजूद पानी की मात्रा कम हो जाती थी, जिस वजह से बैक्टीरिया और फफूंद पनप नहीं पाते थे. यही तरीका आज भी सूखे मेवे, पापड़ और अचार बनाने में इस्तेमाल होता है.
नमक का इस्तेमाल
नमक की खोज के बाद आदिमानव को खाना सुरक्षित रखने का एक बेहद कारगर तरीका मिल गया. मांस के टुकड़ों पर भारी मात्रा में नमक लगाकर रखने से उसमें मौजूद नमी बाहर निकल जाती थी, जिससे बैक्टीरिया के पनपने की संभावना खत्म हो जाती थी. इस तरीके को साल्टिंग कहा जाता है, और यह तरीका इतना असरदार साबित हुआ कि आज भी अचार, नमकीन मछली और कई तरह के मसालेदार खाने बनाने में इसका इस्तेमाल होता है.
यह भी पढ़ें: गुरुग्राम में आज WFH, इस शहर के नीचे किस नदी को किया गया था दफन?
धुएं से खाने को बचाना
आग की खोज के बाद आदिमानव ने एक और तरीका खोजा, धुएं में खाना सुखाना. मांस के टुकड़ों को आग के ऊपर टांगकर धीमी आंच के धुएं में रखा जाता था. इससे न सिर्फ खाने का पानी सूख जाता था, बल्कि धुएं में मौजूद कुछ तत्व खाने को खराब करने वाले बैक्टीरिया को भी रोकते थे. यह तरीका मांस को हफ्तों और कभी-कभी महीनों तक सुरक्षित रखने में मदद करता था.
दलदल की गहराई
वैज्ञानिकों की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि हजारों साल पहले आदिमानव मांस को खराब होने से बचाने के लिए उसे पीट बॉग्स यानी एक खास तरह के दलदल के पानी में डुबो कर रख देते थे. यह कोई आम दलदल नहीं होता था. इस दलदल के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बिल्कुल नहीं होती थी, पानी बहुत ज्यादा ठंडा होता था और इसमें खास तरह का एसिड पाया जाता था. वैज्ञानिकों को यूरोप के कई देशों में इस तरह के दलदलों से हजारों साल पुराना मांस और मक्खन मिला है, जो आज भी काफी हद तक सुरक्षित स्थिति में था.
यह भी पढ़ें: समुद्र का पानी खारा, फिर क्यों नमकीन नहीं होतीं बारिश का बूंदें?
