दुनिया में ऐसे भी कई देश हैं जो विश्व की आर्थिक महाशक्ति के रूप में जाने जाते हैं. उन देशों में सभी संसाधन, पैसा, नागरिकों की हाई लिविंग स्टैंडर्ड्स लाइफस्टाइल, रोजगार के अनेकों अवसर और दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी जैसी सभी चीजें मौजूद हैं जो किसी भी देश को एक सुपरपावर के रूप में पहचान दिलाती हैं.
हालांकि, एक ऐसी चीज जो मानव जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी तत्व है, वो है पानी. उन समृद्धशाली देशों में पानी और खासकर पीने योग्य पानी का कोई प्राकृतिक साधन या स्रोत, जैसे नदियां नहीं हैं जो उन महाशक्तियों के लिए एक सबसे बड़ी चुनौती है.
कुवैत
कुवैत मिडिल ईस्ट का एक ऐसा अरब देश है जहां कोई भी नदी नहीं बहती जो कि पेयजल के लिए सबसे बड़े साधन के रूप में मानी जाती है. डब्ल्यूआरआई (WRI) के एक्वाडक्ट वाटर रिस्क एटलस के आंकड़ों के अनुसार कुवैत दुनिया के सबसे अत्यधिक जल-तनाव (extremely high water stress) वाले देशों में शामिल है. यह देश अपने पीने के पानी का बंदोबस्त डिसैलिनेशन प्रणाली के जरिए करता है, जिसमें समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाया जाता है.
सऊदी अरब
सऊदी अरब मिडिल ईस्ट के सबसे ताकतवर और आर्थिक रूप से सम्पन्न देश है, लेकिन इस देश में एक भी नदी नहीं बहती जो कि इस देश के लिए सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है. यहां भूमिगत पानी का इस्तेमाल किया जाता है जो पीने के पानी की बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर सकता. इसलिए यहां भी डिसैलिनेशन प्लांट लगे हैं जो महासागरों के खारे पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदलते हैं. सऊदी अरब में लगभग 30-40 डिसैलिनेशन प्लांट मौजूद हैं.
कतर
कतर भी अपने पीने के पानी के लिए डिसैलिनेशन प्रणाली पर ही निर्भर है. यह दुनिया के सबसे अमीर और आर्थिक रूप से संपन्न देशों में से एक है, लेकिन इस मुस्लिम देश में न के बराबर बारिश होती है, जिसकी वजह से यहां एक भी नदी नहीं बहती. कतर में 8 डिसैलिनेशन प्लांट हैं जो प्रतिदिन लगभग 695 मिलियन गैलन ताजे पानी का उत्पादन करते हैं.
बहरीन
डब्ल्यूआरआई (WRI) के एक्वाडक्ट वाटर रिस्क एटलस की रिपोर्ट के अनुसार, यह देश भी दुनिया के जल-तनाव (extremely high water stress) वाले देशों की लिस्ट में शामिल है. यह मिडिल ईस्ट का एक रेगिस्तानी देश है जहां पीने का साफ या मीठा पानी उपलब्ध नहीं है. बहरीन भी अपने पीने के पानी की आपूर्ति डिसैलिनेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से ही करता है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
यह देश मिडिल ईस्ट के पर्यटन के मामले में सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले देशों में नंबर 1 पर है, लेकिन यहां भी पेयजल की किल्लत है. मांग बहुत ज्यादा होने की वजह से यह भी डिसैलिनेशन टेक्नॉलजी पर ही निर्भर है. यहां हाल ही में क्लाउड सीडिंग और बड़े स्टोरेज/ड्रेनेज प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए हैं.
ओमान
ओमान में भी पेयजल संकट है. यह लोग पीने के पानी के लिए भूमिगत जल और डिसैलिनेशन टेक्नॉलजी पर ही निर्भर है. यहां स्थायी रूप से बहने वाली नदियां लगभग नहीं होतीं. इसकी जगह ‘वाडी’ (Wadi) नाम की प्राकृतिक रेखाएं मिलती हैं, जो वास्तव में सूखी नदी की धाराएं होती हैं. ये वाडी हर समय पूरी तरह सूखी रहती हैं, लेकिन जैसे ही मौसम में तेज बारिश होती है, इनमें अचानक पानी भर जाता है और यह अस्थायी नदियों व तालाबों का रूप ले लेती हैं.
लीबिया
लीबिया के पास कच्चे तेल के विशाल भंडार हैं, पर यह देश काफी लंबे समय से गंभीर जल-तनाव का सामना कर रहा है. UNICEF की रिपोर्टों में लीबिया को वैश्विक स्तर पर ऊंची जल-तनाव रैंकिंग मिली है. यहां अधिकांश पानी भूजल से आता है और संसाधन घट रहे हैं
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